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भारत की धरती पर स्पेनी दुल्हन, जर्मन दूल्हा
स्पेनी दुल्हन, जर्मन दूल्हा और हिंदुस्तानी शादी. जीहाँ, ऐसा ही कुछ नज़ारा देखने को मिला पिछले दिनों ऋषिकेश के गंगा तट पर जब स्पेन की मार्क और जर्मनी के दाउम वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विवाह-सूत्र में बंध गए. लाल लंहगे और चुनरी में ठीक परंपरागत भारतीय गहनों में सजी-धजी , घूंघट निकाले मार्क को देख कर शायद ही कोई कह सकता था कि वह सात समुंदर पर स्पेन की रहने वाली हैं. और ठीक वैसे ही चूड़ीदार और शेरवानी में झिलमिल सेहरा बाँधे और माथे पर तिलक लगाए दाउम भी दूल्हा बने शरमा रहे थे. पंडित जी ने मंत्र पढ़े, यज्ञ भी हुआ , फेरे भी लिए गए और सिंदूरदान भी हुआ.
यह अनोखी शादी संपन्न हुई ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में. मार्क और दाउम यहाँ आए तो थे योग का प्रशिक्षण लेने लेकिन उन्हें भारतीय संस्कृति इतनी भाई कि उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से शादी करने का फ़ैसला कर लिया. पहले उन्हें यह आशंका थी कि शायद इसके लिए उन्हें धर्म बदलना होगा. इसके लिए उन्होंने ईमेल के ज़रिए आश्रम के चिदानंद स्वामी से संपर्क किया और हिंदू विवाह की अनुमति चाही. मार्क कहते हैं, "हमारे लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था कि बिना धर्म बदले ही हमें हिंदू शादी की इजाज़त मिल गई". "हमारी तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. हम जो चाहते थे हमें मिल गया".
दाउम बताते हैं, "हमारा सिर्फ़ गहनों और सुंदर लिबास का आकर्षण नहीं था बल्कि यहाँ योग और यज्ञ करते हुए हमें जो दैवी अनुभूति हुई उसीसे हमें लगा कि गृहस्थ जीवन की शुरुआत के लिए इससे बेहतर और क्या हो सकता है". आश्रम के लोगों के बीच यह शादी चर्चा का विषय है और स्वामी चिदानंद मुनी तो इस विदेशी युगल के भारत-प्रेम से अभिभूत हैं. वह कहते हैं, "अपने देश के युवा इस महत्व को समझें कि जब पश्चिम की धरती पर जन्मे लोगों को यहाँ की संस्कृति इतनी रास आ सकती है तो यहाँ के युवा पाश्चात्य संस्कृति में क्यों रंगते जा रहे हैं"? यह दोनों अपना हनीमून भी किसी होटल के बजाय गंगा के तट पर ही मना रहे हैं. स्वामी चिदानंद कहते हैं, "यह एक अच्छी शुरुआत है. जब ये अपने देश जाएँगे तो यह संदेश भी ले कर जाएँगे कि भारतीय संस्कृति में धर्म परिवर्तन की ज़रूरत नहीं है". "यह 'इन्क्लूसिव' है 'एक्सक्लूसिव' नहीं". |
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