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लंबे इंतज़ार के बाद सीमा पार से शादी
भारत और पाकिस्तान के बीच यात्रा का एकमात्र साधन दिल्ली-लाहौर बस जब अगले सोमवार को लाहौर से दिल्ली के लिए रवाना होगी तो एक ख़ास बात होगी. वैसे तो उस बस में 52 यात्री होंगे लेकिन उनमें भी एक ख़ास यात्री होंगी ताहिरा बेगम. ख़ास बात ये है कि यह पाकिस्तानी महिला भारत में शादी करने के लिए इस बस में सफ़र कर रही होंगी. भारत सरकार ने भारतीय युवक से शादी के लिए इस युवती ताहिरा बेगम को ख़ासतौर पर वीज़ा दिया है. पाकिस्तानी पंजाब की रहने वाली, कंप्यूटर शिक्षित ताहिरा बेगम भारतीय पंजाब के क़ादियान में बाक़ायदा एक समारोह में मक़बूल अहमद से शादी करेंगी. भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव में हाल के दिनों में आई कमी की बदौलत यह शादी मुमकिन हो रही है.
क़ादियान के मुसलमान ताहिरा बेगम का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं और उनकी शादी के लिए तैयारियों में जुटे हैं. यह शादी सात नवंबर को होनी है. दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर एक चरमपंथी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था और एक बार तो युद्ध की नौबत तक नज़र आने लगी थी. हाल के दिनों में दोनों देशों ने तनाव को कम करने के लिए कुछ क़दम उठाने शुरु किए हैं और दिल्ली-लाहौर बस का चलना भी उन्हीं क़दमों में से एक है. दूल्हा मक़बूल भी ताहिरा बेगम के आने की घड़ी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं. "ताहिरा से मार्च 2001 में हमारे रस्मो-रिवाज़ के मुताबिक मंगनी हुई थी और उसी साल दिसंबर में निक़ाह तय हुआ था लेकिन दोनों मुल्कों के बीच हालात ख़राब हो गए और हमें अपनी शादी के लिए इतना लंबा इंतज़ार करना पड़ा है." इस बीच दोनों परिवारों ने किसी तीसरे देश से होकर भी भारत या पाकिस्तान में दाख़िल होने की कोशिश की लेकिन नाकाम रही. जब भारत और पाकिस्तान दोनों ने अपने-अपने यहाँ एक दूसरे के दूतावास भी बंद कर दिए तो दोनों का मिलना जैसे नामुमकिन नज़र आने लगा था. मक़बूल कहते हैं, "हम बहुत ही मायूस महसूस कर रहे थे क्योंकि मेरे परिवार में इस पीढ़ी में यह पहली शादी है और मेरी बीमार माँ इस शादी को देखने के लिए बहुत उम्मीदें लगाए हुए हैं." वीज़ा लेकिन दोनों देशों के बीच संबंध ख़राब होने की वजह से वीज़ा हासिल करना भी एक बड़ी समस्या रही है.
तब एक बार उन्होंने भारत-पाकिस्तान दोस्ती फ़ोरम की नई दिल्ली में हुई बैठक में अपनी समस्या रख दी. इस बैठक में पत्रकार और सांसद कुलदीप नैयर और पूर्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल भी मौजूद थे. बात में कुछ वज़न पड़ा और इन लोगों की निजी गुज़ारिश पर भारत सरकार ने ताहिरा बेगम को वीज़ा देने की हामी भर ली. ख़ुशक़िस्मत दोनों देशों के ऐसे बहुत से युवक-युवतियाँ हैं जो शादी करने की तमन्ना रखते हैं लेकिन वे मक़बूल और ताहिर की तरह ख़ुशक़िस्मत नहीं हैं. पंजाब के एक मात्र मुस्लिम बहुल इलाक़े मालेरकोटला के एक प्रोफ़ेसर मोहम्मद रफ़ी कहते हैं, "दोनों देशों के बीच सफ़र करने के सीमित साधनों को देखते हुए वीज़ा और बस में सीट पाना बहुत ही मुश्किल हैं."
52 यात्रियों के बैठने की क्षमता वाली यह बस दिल्ली और लाहौर के बीच सप्ताह में चार बार चलती है और फिलहाल तो दोनों देशों के बीच यात्रा का यही एक मात्र यही साधन है. बस में सफ़र करने के लिए दोनों ही तरफ़ भारी भीड़ रहती है और टिकट लेने के लंबे इंतज़ार के साथ-साथ लंबी लाइनों में भी लगना पड़ता है. साजिदा बेगम लाहौर में अपने परिवार से मिलने के लिए आतुर हैं लेकिन उनका कहना है कि दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर पाँच दिन तक लाइन में लगे रहने के बाद अब उन्होंने उम्मीद छोड़ दी है. मालेरकोटला के एक डॉक्टर अब्दुल गफ़्फ़ार कहते हैं, "वीज़ा वे लोग ही हासिल कर पाते हैं जो यह साबित करने में कामयाब हो जाते हैं कि उनका पाकिस्तान जाना बहुत अहम है." अब्दुल गफ़्फ़ार कहते हैं कि एक ख़ास बात ये है कि भारत और पाकिस्तानी अधिकारी दोनों ही युवाओं को वीज़ा देने से क़तरा रहे हैं और यह एक नियम सा बन गया है. लेकिन इन सब दुश्वारियों के बावजूद भारत और पाकिस्तान के मुसलमानों के बीच संबंध बरक़रार हैं और दोनों देशों के बीच तनाव कम होने से ऐसी उम्मीदें भी बढ़ी हैं कि आने वाले दिनों में हालात और सुधरेंगे. |
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