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भाजपा का 'राष्ट्रवाद और विकास' पर ज़ोर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि वह अपनी विचारधारा पर ध्यान देते हुए संगठन को मज़बूत करेगी और उसका आधार बढ़ाने का साथ-साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सहयोगियों के साथ काम करेगी. भाजपा ने अपनी तीन दिवसीय 'चिंतन बैठक' के बाद दस सूत्री निष्कर्ष जारी किया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भाजपा अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने पत्रकारों को बताया, "पार्टी राष्ट्रवाद और विकास के बारे में प्रतिबद्ध है. इन दोनों मुद्दो को अलग नहीं कर सकते क्योंकि राष्ट्रवाद की भावना के बिना विकास संभव नहीं." उनका ये भी कहना था कि विभिन्न वर्गों के आर्थिक विकास के बिना राष्ट्रवाद की बात नहीं की जा सकती. समाचार एजेंसियों के अनुसार भाजपा की 'चिंतन बैठक' में उत्तर प्रदेश में पार्टी में नई जान फूँकने पर चर्चा हुई. साथ ही महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने का भी फ़ैसला किया गया. इस बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और अन्य नेताओं के साथ पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने भाग लिया. एजेंसियों के अनुसार पार्टी ने कांग्रेस और वाम दलों की 'छद्म' धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ़ पूरे देश में अभियान छेडने और धर्म के आधार पर आरक्षण को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाने की भी घोषणा की. |
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