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शनिवार, 31 जुलाई, 2004 को 21:38 GMT तक के समाचार
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भाजपा की चुनावी हार पर चिंतन

भाजपा पोस्टर
हार के कारणों की तह में जाने का भाजपाई प्रयास
गोवा में भारतीय जनता पार्टी की चिंतन बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सहित पार्टी के 30 शीर्ष नेता पिछले लोकसभा चुनाव में मिली हार के कारणों के अध्ययन में जुट गए हैं.

मीडिया को बैठक स्थल से दूर रखा गया है और पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नक़वी पत्रकारों को बैठक के बारे में संक्षिप्त जानकारी दे रहे हैं.

गोवा से दैनिक 'सूनाप्रांत' के संपादक संदेश प्रभु देसाई ने बताया है कि भाजपा नेतृत्व हार से उबरने के लिए हिंदुत्त्व धारा की तरफ़ पूरी तरह से लौटने के बारे में गंभीरता से विचार कर रहा है.

उधर विश्व हिदू परिषद के अलग राजनैतिक दल बनाने की धमकी और अशोक सिंघल द्वारा शुक्रवार को भाजपा को हिंदू विरोधी कहने के बाद भाजपा से जुड़े संगठन आरएसएस ने स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के प्रयास तेज़ कर दिए हैं.

इसी कड़ी में आरएसएस के वरिष्ठ नेता मदन दास देवी का भाजपा की इस बैठक में भाग लेना महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है.

हालांकि आरएसएस ने अभी तक भाजपा को हिंदूत्त्व पर पूरी तरह लौटने के लिए कोई समयसीमा तो नहीं बताई है, लेकिन गोवा रवाना होने से पहले वाजपेयी और आडवाणी के साथ आरएसएस के पदाधिकारियों ने बैठक कर संघ का संदेश उन्हें साफ-साफ सुना दिया है.

पर्यवेक्षकों का मानना है कि भाजपा के लिए हिंदुत्त्व का पुराना रास्ता अपनाना राजनैतिक मजबूरियों के कारण आसान नहीं हैं, क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रमुख घटक होने के साथ-साथ आने वाले दिनों में कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी को राजग के घटक दलों के साथ मिलकर ही चुनाव लड़ने होंगे.

शिवसेना को छोड़ राजग का कोई भी घटक भाजपा की हिंदुत्त्व लाइन को स्वीकरने की स्थिति में नहीं है.

विरोध शुरु

राजग के एक घटक जनता दल(यूनाइटेड) ने साफ कर दिया है कि अगर भाजपा ने हिंदूत्त्व पर लौटने का फैसला किया तो वो भी अपना फैसला करने के लिए स्वतंत्र होंगे.

 जिन विवादित मुद्दो को 1998 से पहले छोड़ दिया गया था, अगर कोई दल उन्हीं पर लौटता है, तो राजग का कोई मतलब नहीं रह जाएगा
दिग्विजय सिंह

पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह ने बीबीसी को बताया कि “अगर भाजपा हिंदुत्त्व पर लौटती है तो हम भी अपने तौर पर फैसला करने के लिए स्वतंत्र होंगे. हम भी दोबारा अपनी समाजवादी धारा पर लौट सकते हैं.”

उन्होंने कहा, “जिन विवादित मुद्दो को 1998 से पहले छोड़ दिया गया था, अगर कोई दल उन्हीं पर लौटता है, तो राजग का कोई मतलब नहीं रह जाएगा.”

भाजपा की मुश्किलें केवल हिंदुत्त्व का विरोध करने वाले ही राजग घटक नहीं बढ़ा रहे हैं. हाल ही में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी राजग की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया था.

इन सब घटनाओं को देखते हुए भापजा आने वाले दिनों में रणनीति अपनाती है, इस बैठक पर निर्भर करेगा.

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