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शुक्रवार, 16 जुलाई, 2004 को 16:53 GMT तक के समाचार
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हिंदुत्व: भाजपा पर आरएसएस का दबाव

आरएसएस की शाखा
भाजपा मूल रुप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राजनीतिक शाखा है
लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की अप्रत्याशित हार के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पार्टी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है और हिंदुत्व विचारधारा पर पूरा ध्यान केंद्रित करने पर ज़ोर दिया है.

संघ के प्राँत प्रचारकों की पिछले दिनों रायपुर में तीन दिन की बैठक हुई थी जिसमें कई मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन इस मुद्दे पर सभी की सहमति थी.

इस बारे में संघ प्रवक्ता राम माधव ने बताया, "हार के मुख्य कारणों से हम सहमत हैं. विवेचना हुई और सभी इस बात पर एकमत थे कि राष्ट्रवादी विचारधारा, जिसे आप हिंदुत्व कहते हैं, को बढ़ावा दिया जाएगा. सभी स्वयंसेवक इसी काम में जुट जाने वाले हैं."

प्रांत प्रचारकों की बैठक में कहा जाता है कि कुछ लोगों ने हार के लिए लाल कृष्ण आडवाणी को ज़िम्मेदार ठहराया है.

इस बारे में राममाधव का कहना है कि जब दो सौ लोग बोलते हैं तो बहुत बातें होती हैं.

दूरदृष्टि

संघ ने आँध्र प्रदेश में आर्थिक रूप से पिछड़े मुस्लिमों को आरक्षण दिए जाने के फ़ैसले का भी कड़ा विरोध किया.

 संघ अगले एक साल में अपनी शाखाओं की संख्या 40 हज़ार से बढ़ाकर 75 हज़ार करना चाहता है. ये नई शाखाएँ ख़ासतौर पर उन इलाकों में खोली जाएँगी, जो नक्सल प्रभावित हैं, आदिवासी बाहुल्य हैं और जहाँ धर्मांतरण अधिक हो रहा है
राममाधव, प्रवक्ता

उनका कहना था, "ये मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति है. जब से केंद्र में नई सरकार आई है, मुस्लिमों को बेवजह प्रमुखता दी जा रही है. ये विभाजन से पहले जैसी स्थिति पैदा करने जैसी बात है. हम इसका विरोध करते हैं."

राम माधव ने बताया, "संघ अगले एक साल में अपनी शाखाओं की संख्या 40 हज़ार से बढ़ाकर 75 हज़ार करना चाहता है. ये नई शाखाएँ ख़ासतौर पर उन इलाकों में खोली जाएँगी, जो नक्सल प्रभावित हैं, आदिवासी बाहुल्य हैं और जहाँ धर्मांतरण अधिक हो रहा है."

जानकार मानते हैं कि इसके पीछे राजनीतिक दूरदृष्टि है.

नेपाल से केरल, जहाँ आरएसएस अपनी शाखाएँ खोलना चाहता है, उसमें बिहार, झारखंड, तमिलनाडु, आँध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि आते हैं.

इन राज्यों में भाजपा की स्थिति नाज़ुक है. संघ वनवासी कल्याण आश्रम जैसे सफल प्रयोग गुजरात और छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश में भी कर चुका है.

हिंदुत्व

रायपुर की बैठक में महिलाओं की भागीदारी शाखाओं में करने की ख़बर थी.

आरएसएस शाखा
आरएसएस भाजपा में बड़े बदलाव की योजना बना रही है

इस पर चुटकी लेते हुए राम माधव ने कहा, "ये तो अच्छी ख़बर है हमारे लिए, आप हमें पुरुषवादी बोलते हैं न. शाखाओं में महिलाएँ नहीं जातीं. बाकी संघ के अन्य कार्यक्रमों में और संघ के अन्य संगठनों मसलन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद आदि में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी होती है."

संघ के सहयोगी संगठन विश्व हिंदू परिषद द्वारा नया राजनीतिक मंच बनाए जाने का आह्वान के बारे में राम माधव ने कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन इतना ज़रूर कहा कि संघ के कुछ लोग पार्टी में जाने वाले हैं यानी भाजपा में हिंदुत्व विचारधारा को और मजबूत किया जाएगा.

ख़बरें हैं कि मदन दास देवी और गोविंदाचार्य भाजपा में जा सकते हैं.

जानकारों का कहना है कि जिस तरह सत्तर के दशक में जनसंघ की हार के बाद आरएसएस ने कड़ा रुख़ अपनाया और नई पार्टी की घोषणा हुई, कुछ वैसा ही इस बार भी हो रहा है.

पार्टी का नाम शायद ही बदला जाए पर संघ, भाजपा में अपनी विचारधारा पूरी तरह से लागू करने की कोशिश में है ताकि पार्टी का कलेवर बदल सके.

संघ की यह नई सोच समय की माँग है या फिर राजनीतिक बंदोबस्त का नया दौर, यह कहना अभी मुश्किल होगा.

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