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'विपक्ष का बहिष्कार का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसदीय समितियों का बहिष्कार करने के विपक्षी दलों के निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए फ़ैसला वापस लेने की अपील की है. शिबू सोरेन के मामले में कई दिनों तक संसद की कार्यवाही ठप करने के बाद विपक्षी गठबंधन एनडीए ने सोमवार को संसदीय समितियों का बहिष्कार करने की घोषणा की है. इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए मनमोहन सिंह ने बिहार की राजधानी पटना में विपक्ष के फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने विपक्षी दलों से अपने फ़ैसले को वापस लेने की अपील की. मनमोहन सिंह ने कहा,"सरकार विपक्ष समेत किसी के भी साथ उलझना नहीं चाहती है और मैं विपक्ष से बहिष्कार का फ़ैसला वापस लेने की अपील करूँगा". उन्होंने कहा कि देश के सामने इस समय कई गंभीर मुद्दे हैं जिनपर सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिलकर विचार करना चाहिए. बहिष्कार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बैठक के बाद कहा गया है कि सरकार के टकराववादी रवैये के ख़िलाफ़ यह निर्णय लिया गया है. पूर्व कोयला मंत्री शिबू सोरेन के मामले में एनडीए माँग कर रहा था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सदन में ख़ुद आकर बयान दें. लेकिन सरकार की ओर से कहा गया कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है. मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के निवास पर एक घंटे चली एनडीए नेताओं की बैठक में निर्णय लिया गया कि एनडीए लोकसभा और राज्यसभा की संसदीय समितियों का बहिष्कार करेगा. इसका मतलब यह है कि दोनों सदनों की संसदीय सलाहकार और स्थाई समितियों की बैठक में एनडीए का कोई नेता नहीं जाएगा. पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के निवास पर हुई बैठक में एनडीए के संयोजक जॉर्ज फ़र्नांडिस, विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा नेता जसवंत सिंह, सुषमा स्वराज, विजय कुमार मलहोत्रा और जनता दल नेता नीतीश कुमार मौजूद थे. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इस बैठक के बाद विजय कुमार मलहोत्रा ने कहा, "सरकार ने टकराववादी नीतियों की हद कर दी है, कहाँ तो विपक्ष दाग़ी मंत्रियों के मामले में प्रधानमंत्री से बयान की माँग कर रहा था और कहाँ राज्यसभा में सदन के नेता प्रणव मुखर्जी ने विपक्ष के ख़िलाफ़ ही निंदा प्रस्ताव पढ़ दिया." इससे पहले रविवार को एनडीए के विभिन्न दलों के 25 से अधिक सांसदों ने राष्ट्रपति अब्दुल कलाम से मिलकर माँग की थी कि वे दाग़ी मंत्रियों के मामले में हस्तक्षेप करें और प्रधानमंत्री को सलाह दें कि वे ऐसे मंत्रियों को निकाल दें. विपक्ष ने इस मुद्दे पर कई दिनों तक संसद की बैठक भी नहीं चलने दी थी. |
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