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तमिलनाडु के स्कूल में भीषण आग, 84 बच्चे मारे गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिलनाडु के तंजावुर ज़िले के कुंभकोणम शहर में शुक्रवार सुबह एक स्कूल में लगी भीषण आग में मरनेवाले बच्चों की संख्या बढ़कर 84 हो गई है. अधिकारियों के अनुसार लगभग 100 बच्चे घायल हैं जिनका इलाज किया जा रहा है. इस दर्दनाक हादसे के बाद इस स्कूल के प्रधानाचार्य को गिरफ़्तार कर लिया गया है. राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस दर्दनाक हादसे पर दुःख और संवेदना प्रकट की है. उन्होंने राहत कार्य का जायज़ा लेने के लिए संचार मंत्री दयानिधि मारन को दुर्घटनास्थल पर जाने को कहा है. संसद में भी इस अग्निकांड पर शोक प्रकट किया गया. राज्य की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने इस हादसे के लिए स्कूल प्रशासन और शिक्षा संस्थानों को क़सूरवार ठहराते हुए उनपर लापरवाही का आरोप लगाया है. उन्होंने घटनास्थल का जायज़ा लेने के बाद हादसे की जाँच के आदेश दिए. उन्होंने इस स्कूल का लाइसेंस रद्द कर दिया और साथ ही कुछ अधिकारियों को लापरवाही के लिए निलंबित भी कर दिया. आग शुक्रवार की सुबह जिस स्कूल में आग लगी वहाँ कुल 900 बच्चे पढ़ते थे जिनमें से ज़्यादातर बच्चे पाँच से 13 साल की उम्र के थे. आग पहले स्कूल की पहली मंज़िल की छत में लगी और देखते ही देखते ही उसने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया. आग लगने के समय स्कूल के उस हिस्से में क़रीब 200 बच्चे मौजूद थे. मृतकों में ज़्यादातर लड़कियाँ हैं. दो अध्यापिकाएँ भी मारी गईं. तंजावुर के ज़िलाधिकारी जे राधाकृष्णन ने बीबीसी को बताया है कि अस्पताल में भर्ती कराए गए 30 घायलों में से कम-से-कम 10 की हालत बहुत गंभीर है और उनके शरीर 90 प्रतिशत तक जल गए हैं. ज़िलाधिकारी ने बताया कि मूल रूप से तो इमारत पक्की बनी है लेकिन उसकी छत का विस्तार किया गया जिसमें नारियल की लकड़ी और पत्तों का इस्तेमाल किया गया जिसने आग जल्दी पकड़ ली. कारण
बताया जा रहा है कि आग उस समय लगी जब कुंभकोणम शहर के एक स्कूल में बच्चों के लिए दोपहर का भोजन तैयार किया जा रहा था. समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "शुरूआती अनुमान से पता चला है कि बच्चों के लिए दोपहर का भोजन तैयार करते वक़्त रसोईघर में एक खुले चूल्हे से यह आग भड़की." आग में झुलसे अनेक बच्चे इस हद तक जल गए कि उनकी पहचान भी मुश्किल है. कुछ माँ-बाप तो बच्चों के शवों को देखकर बेहोश हो गए. दुख और ग़ुस्से से भरे कुछ लोगों ने स्कूल के मालिक को गिरफ़्तार करने की माँग की है. स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल से बाहर निकलने का रास्ता बहुत संकरा था जिसकी वजह से बहुत से बच्चे आग से बचकर बाहर नहीं निकल पाए होंगे. मलबे में तलाश की जा रही है कि शायद कोई बच्चा जीवित बचा हो. दूसरा हादसा तमिलनाडु में इस साल आग लगने की ये दूसरी सबसे भीषण घटना है. राज्य में इसी साल जनवरी में एक विवाह मंडप में लगी आग में 59 लोग ज़्यादा लोग मारे गए थे जिनमें दूल्हा भी था. उस घटना के बाद प्रशासन ने सार्वजनिक इमारतों में से बचाव के लिए समुचित इंतज़ाम किए जाने के आदेश दिए थे लेकिन उन पर पूरी तरह अमल नहीं देखा जा रहा है. |
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