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करुणा अपना राजनीतिक दल बनाएंगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई से अलग हुए कर्नल करुणा ने कहा है कि पूर्वी श्रीलंका के लोग अभी भी उनका समर्थन करते हैं और वे जल्दी ही एक राजनीतिक दल गठित करने जा रहे हैं. तीन महीने पहले लापता हो गए कर्नल करुणा ने बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा है कि उन्होंने अपने समर्थकों को इसलिए घर भेज दिया ताकि आपसी झगड़ों में ख़ूनख़राबे को रोका जा सके. उन्होंने सरकारी रेडियो को भी एक साक्षात्कार दिया है. दूसरी ओर एलटीटीई ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हुए कहा है कि करुणा को सरकार खुला समर्थन दे रही है और इसीलिए वे इस तरह के साक्षात्कार दे पा रहे हैं. कर्नल करुणा को एलटीटीई में वी प्रभाकरण के बाद दूसरे नंबर पर माना जाता था और वे अपने हज़ारों समर्थकों के साथ एलटीटीई से अलग हो गए थे. राजनीतिक दल कर्नल करुणा का लापता होना पिछले महीनों में श्रीलंका की राजनीति में गर्मागर्म बहस का विषय रहा है. सरकार और सेना ने कहा था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि कर्नल करुणा कहाँ हैं. लेकिन एलटीटीई का कहना था कि सेना का ख़ुफ़िया तंत्र करुणा की सहायता करता रहा है ताकि एलटीटीई को कमज़ोर किया जा सके. बीबीसी की तमिल सेवा से मोबाइल पर हुई बातचीत में कर्नल करुणा ने कहा कि पहले तो वे राजधानी कोलंबो में ही थे लेकिन अब वे फिर से पूर्वी श्रीलंका में आ गए हैं और वे यह नहीं बता सकते कि वे किस जगह पर हैं. उन्होंने इस बात से इंकार किया है कि उनका श्रीलंकाई सेना से कोई संबंध है या पूर्वी श्रीलंका में हाल में भड़की हिंसा में उनका कोई हाथ है. उनका कहना था कि वे जल्दी ही एक राजनीतिक पार्टी बनाने जा रहे हैं. इसके बाद करुणा ने श्रीलंका के सरकारी रेडियो को भी एक साक्षात्कार दिया था. एलटीटीई नाराज़ इसके बाद एलटीटीई ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उनका कहना है कि श्रीलंका सरकार करुणा को खुला समर्थन दे रही है ताकि एलटीटीई के ख़िलाफ़ प्रचार किया जा सके. एलटीटीई का कहना है कि कोशिश ये है कि युद्धविराम से जो छवि बनी है उसे ख़राब किया जा सके. एलटीटीई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा है कि यदि श्रीलंका सरकार युद्ध थोपती है तो वे इसके लिए भी तैयार हैं. |
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