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'सेना ने करुणा को भागने में मदद की' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका सरकार ने मान लिया है कि तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई के विद्रोही नेता करुणा को निकल भागने और एलटीटीई के ख़िलाफ़ लड़ने में सेना ने मदद की थी. श्रीलंका के सूचना मंत्री मंगला समरवीरा ने कहा है कि इस घटना की एक अनौपचारिक जाँच करवाई गई थी. उन्होंने कहा है कि इस ख़बर से शांति प्रक्रिया को नुक़सान पहुँचेगा. इससे पहले सेना लगातार इस बात से इंकार कर रही थी कि उसने करुणा को निकल भागने में मदद की थी. हाल तक एलटीटीई के नंबर दो नेता रहे करुणा के बारे में यह नहीं पता है कि वो अब कहाँ हैं. करुणा चार महीने पहले एलटीटीई से अलग हो गए थे और थोड़े दिनों तक एलटीटीई के ख़िलाफ़ लड़ने के बाद वे ग़ायब हो गए थे. अब जाकर विपक्ष के एक सांसद ने स्वीकार किया है कि उन्होंने कर्नल करुणा को जंगल से निकालकर राजधानी तक पहुँचाया था. करुणा के साथ रहे विद्रोही, जो बाद में निकल भागने में सफल रहे, कह रहे हैं कि करुणा दो महीने तक सेना के संरक्षण में रहे और वहाँ से एलटीटीई के विद्रोहियों को कमज़ोर करने में सेना की मदद करते रहे. और यह सब तब हो रहा था जब सरकार की ओर से एलटीटीई के साथ शांतिवार्ता फिर शुरु करने की कोशिश हो रही थी. पहले तो सेना की ओर से लगातार इंकार किया जाता रहा लेकिन अब सूचना मंत्री ने स्वीकार किया है कि सेना इसमें शामिल थी. हालांकि वे कह रहे हैं कि यह सब सरकार की जानकारी के बिना ही हुआ. मंत्री का तो आरोप है कि विद्रोही नेता को सहायता पहुँचाना विपक्ष की एक साजिश थी जिससे कि सरकार के साथ शांति प्रक्रिया में बाधा पहुँचाई जा सके. करुणा की सहायता करने वाले विपक्ष के सांसद अली ज़हीर मौलाना ने पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया है. |
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