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एलटीटीई ने बाग़ी नेता को निकाला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई ने बाग़ी नेता कर्नल करुणा को अपने संगठन से निकाल दिया है. एलटीटीई ने कर्नल करुणा के साथ मतभेद का कोई कारण नहीं बताया लेकिन इतना ज़रूर कहा कि कर्नल करुणा संगठन के लक्ष्यों से भटक गए हैं. एलटीटीई ने कर्नल करुणा को गद्दार कहा है और यह भी स्पष्ट किया है कि उनके साथ कोई नहीं है. किलीनोची स्थिति एलटीटीई के मुख्यालय से बीबीसी संवाददाता फ़ैंसिस हैरिसन का कहना है कि कर्नल करुणा से मतभेद का कारण शांति प्रक्रिया हो सकती है. दूसरी ओर शुक्रवार को श्रीलंका सरकार ने तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई से अलग हुए एक विद्रोही नेता कर्नल करुणा के गुट के साथ बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया. श्रीलंका सरकार ने कहा कि वे तमिल विद्रोही नेता कमांडर विनायगमूर्ति मुरलीधरन उर्फ़ कर्नल करुणा की ओर से आए इस प्रस्ताव को नहीं स्वीकार कर सकते. कर्नल करुणा ने मतभेद के बाद एलटीटीई प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन के संगठन से अलग होने की घोषणा की है. प्रस्ताव मंज़ूर नहीं कर्नल करुणा ने प्रभाकरन से नाता तोड़ने के बाद अपने गुट के साथ सरकार से अलग से संघर्षविराम के बारे में बात करने की पेशकश की थी. मगर श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय में एक बड़े अधिकारी सिरिल हेरात ने इसे मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, "जब प्रधानमंत्री और प्रभाकरन के बीच एक संघर्षविराम समझौते पर दस्तख़त हो चुके हैं तो हम किसी और के साथ समझौता कैसे कर सकते हैं?" मगर उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों गुट आपस में संघर्ष की शुरूआत नहीं कर देंगे. अनिश्चय श्रीलंका में सरकार और तमिल विद्रोहियों ने 2002 में संघर्षविराम समझौते पर दस्तख़त किए थे जो शांतिवार्ता के रुक जाने के बाद भी लागू है. मगर एलटीटीई में इस अचानक टूट के बाद शांति प्रक्रिया पर अनिश्चय के बादल मंडराने लगे हैं. कर्नल करुणा श्रीलंका सरकार के साथ बातचीत में हिस्सा लेते रहे थे. वैसे अभी ये पता नहीं चल सका है कि कर्नल करुणा आख़िर किस कारण से अलग हुए. वैसे बताया जाता है कि वे इस बात से नाखुश थे कि एलटीटीई में लड़ाई लड़नेवाले सैनिकों की भर्ती तो पूर्व से होती है मगर संगठन का नियंत्रण उत्तर से आनेवाले लोगों के हाथ में है. |
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