| एलटीटीई में 'टूट' की ख़बर से सरगर्मी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई में मतभेद की ख़बरों के बीच श्रीलंका में संघर्षविराम निगरानी समिति के प्रमुख ने विद्रोहियों से मुलाक़ात की है. बुधवार को ऐसी ख़बरें आई थीं कि एलटीटीई के एक क्षेत्रीय कमांडर कर्नल करूना और एलटीटीई के बीच प्रभाकरन के बीच मतभेद हैं. हालाँकि इसके बाद तमिल विद्रोहियों की समर्थक एक वेबसाइट ने एलटीटीई में टूट की ख़बर को ग़लत बताया. इसके बाद गुरूवार को सरकार और विद्रोहियों के बीच संघर्षविराम पर निगरानी रखनेवाले नॉर्वे के दल के प्रमुख मेजर जनरल ट्रॉंन्ड फ़ुरूहोवडे ने उत्तरी श्रीलंका में विद्रोहियों के गढ़ जाकर उनकी राजनीतिक शाखा के प्रमुख से मुलाक़ात की. उन्होंने बैठक को सकारात्मकर बताया मगर इसका कोई ब्यौरा देने से इनकार कर दिया. इनकार श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों की एक समर्थक वेबसाइट ने ये ख़बर प्रकाशित की है कि तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई में कोई बड़ा विभाजन नहीं हुआ है. इस वेबसाइट ने एक वरिष्ठ विद्रोही कमांडर कर्नल करूना के बारे में ये लिखा है कि वे भविष्य में सीधे एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरन से निर्देश लेंगे. ये ख़बर आने के बाद श्रीलंका के प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने नॉर्वे के मध्यस्थों के साथ एक आपात बैठक की. अस्पष्ट स्थिति अभी ये स्पष्ट नहीं है कि एलटीटीई में विद्रोह के बारे में स्वयं कर्नल करूना ने खुलकर कोई बयान क्यों नहीं दिया. हालाँकि अगर सचमुच उन्होंने प्रभाकरन को चुनौती दी है तो उनकी ज़िंदगी ख़तरे में पड़ सकती है. कर्नल करूना के साथ के कुछ विद्रोहियों ने निजी तौर पर ये बताया है कि प्रभाकरन ने कर्नल करूना से ये कहा था कि वे पूर्वी श्रीलंका से 1,000 विद्रोही उनके उत्तरी क्षेत्र में भेजें. विद्रोहियों का कहना है कि कर्नल करूना ने इस आदेश का पालन नहीं किया. उनके अनुसार इसका कारण ये नाखुशी हो सकती है कि एलटीटीई में लड़नेवाले सदस्य तो पूर्व से आते हैं मगर आँदोलन का नियंत्रण उत्तर से हो रहा है. मगर अभी ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये पुराना मतभेद ऐसे समय क्यों उभरा है जबकि वहाँ चुनाव अभियान ज़ोर पकड़ रहा है. |
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