BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 30 जून, 2004 को 14:27 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
चौधरी शुजात का राजनीतिक सफ़र
शुजात हुसैन
शुजात हुसैन को नेशनल एसेंबली का नेता चुन लिया गया था
चौधरी शुजात हुसैन ने बुधवार 30 जून 2004 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली.

चौधरी शुजात हुसैन का राजनीतिक जीवन क़रीब 25 वर्ष लंबा है. चौधरी शुजात हुसैन एक ऐसे परिवार से संबंध रखते हैं जिसने हमेशा ही देश में सैनिक शासकों का समर्थन किया है.

चौधरी शुजात हुसैन की उम्र 58 साल हो चुकी है और उनकी सेहत भी बहुत अच्छी नहीं रहती है लेकिन उन्होंने ख़ुद को हमेशा ही राजनीतिक रूप से बहुत तेज़ तर्रार होने का अहसास दिलाया है, हालाँकि कुछ लोग उन्हें राजनीतिक रूप से बहुत परिपक्व नहीं मानते हैं.

चौधरी शुजात हुसैन के परिवार की 1950 के दशक तक कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं थी.

उनके पिता चौधरी ज़हूर इलाही एक मध्यम वर्गीय व्यक्ति थे और 1950 के दशक में वह स्थानीय निकायों के चुनावों में जीते तो उन्हें राजनीतिक पहचान मिली.

इस परिवार के पास अब कुछ औद्योगिक इकाइयाँ भी हैं जिनमें चीनी, कपड़ा, आटा मिलें और कृषि का सामान बनता है.

ज़हूर इलाही ने अपने परिवार को देश के बड़े ख़ानदानों में शादियाँ करके रिश्तेदारियाँ जोड़ी हैं.

इस परिवार ने देश के सैनिक शासकों से हमेशा ही दोस्ताना संबंध रखे हैं और जनरल अय्यूब ख़ान (1958-68), जनरल ज़ियाउल हक़ (1977-88) और अब जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ अच्छे ताल्लुक़ात रखे हैं.

चुनावी अनुभव

चौधरी शुजात हुसैन ने अपने पिता ज़हूर इलाही की हत्या के बाद 1982 में क़दम रखा.

जनरल ज़ियाउल हक़ ने चौधरी शुजात हुसैन को अपनी सलाहकार समिति - मजलिसे शूरा का एक सदस्य बनाया और बाद में उन्हें एक मंत्री भी बनाया गया.

चौधरी शुजात हुसैन और शौक़त अज़ीज़
हुसैन की शौक़त अज़ीज़ से अच्छी दोस्ती है

1985 से चौधरी शुजात हुसैन ने चार बार संसद का चुनाव जीता और वह केंद्र में मोहम्मद ख़ान जुनेजो और नवाज़ शरीफ़ की सरकारो में मंत्री भी रहे.

चौधरी शुजात हुसैन हमेशा ही सेना के नज़दीक रहे हैं और जब जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने नवाज़ शरीफ़ की सरकार का तख़्ता पलट दिया तो हुसैन ने नवाज़ शरीफ़ से भी दूरी बढ़ा ली.

जब नवाज़ शरीफ़ को दिसंबर 2000 में देश से बाहर भेज दिया गया तो चौधरी शुजात हुसैन ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग को विभाजित करने के लिए काम किया. इस विभाजन के बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग के मुशर्रफ़ समर्थक धड़े का गठन किया गया.

चौधरी शुजात हुसैन इसी पार्टी के अध्यक्ष हैं जो सत्तारूढ़ भी है.

चौधरी शुजात हुसैन को बहुत अच्छा वक्ता नहीं माना जाता है और वह जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ लाहौर के फ़ोरमन क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़े हैं.

चौधरी शुजात हुसैन ने अपने पुराने दोस्त मीर ज़फ़रुल्लाह ख़ान जमाली को भी नवंबर 2002 में प्रधानमंत्री बनाने के लिए काफ़ी कोशिशें की थीं लेकिन बाद में वह जमाली के काम से नाख़ुश हो गए.

जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के भी नाख़ुश होने पर जमाली ने 26 जून को इस्तीफ़ा दे दिया.

चौधरी शुजात हुसैन ने बुधवार, 30 जून 2000 को देश के 20वें प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला, लेकिन वह कुछ ही महीनों के लिए इस पद पर रहेंगे.

उन्होंने देश के वित्त मंत्री शौक़त अज़ीज़ को पहले ही अगला प्रधानमंत्री मनोनीत कर चुके हैं लेकिन वह नेशनल एसेंबली के लिए चुने जाने के बाद इस पद पर बैठ सकेंगे.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>