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कश्मीर और भरोसा बढ़ाने पर हुई बातचीत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव स्तर की दो दिन की बातचीत समाप्त हो गई है. दूसरे दिन की बातचीत में मुख्य तौर पर कश्मीर मामले और शांति तथा सुरक्षा के संबंध में चर्चा हुई. बातचीत के बाद एक साझा घोषणापत्र जारी किया गया है. पाकिस्तानी दल ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की ओर से भारतीय राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया है. भारत में नई सरकार आने के बाद से दोनों देशों के बीच ये पहली उच्च स्तरीय वार्ता थी. भारतीय दल का नेतृत्व विदेश सचिव शशांक और पाकिस्तानी दल का वहाँ के विदेश सचिव रियाज़ खोखर कर रहे थे. दूसरे दिन बातचीत का समय आगे कर उसे पहले ही ख़त्म करना पड़ा क्योंकि पाकिस्तानी विदेश सचिव को उनके देश के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के कारण जल्दी लौटना पड़ रहा है. साझा घोषणापत्र दोनों देशों के साझा घोषणापत्र में कहा गया है कि दोनों देशों ने शांति और स्थिरता पर बात की जिनमें आपसी विश्वास बढ़ाने के उपाय और कश्मीर का मामला भी शामिल है. दोनों पक्षों ने दिल्ली में परमाणु क्षेत्र में आपसी विश्वास मज़बूत करने के लिए 19-20 जून को अधिकारियों की बैठक में की गई सिफ़ारिशों को भी स्वीकार किया. ये भी तय हुआ है कि दोनों देश ऐसा समझौता करेंगे जिसके तहत मिसाइलों के परीक्षण से पहले एक-दूसरे को सूचित किया जाएगा. विशेषज्ञों को समझौते का मसौदा बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. दोनों देशों ने कश्मीर मामले पर भी विस्तार से चर्चा की और शांतिपूर्ण समाधान के लिए सतत और गंभीर बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए. दूतावास और क़ैदियों की रिहाई दोनों देशों ने ये तय किया है कि एक-दूसरे के यहाँ अपने दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या तत्काल पहले की तरह 110 कर दी जाएगी. साथ ही दोनों देशों में मुंबई में पाकिस्तानी और कराची में भारतीय वाणिज्य दूतावास खोलने के बारे में भी सैद्धांतिक रूप से सहमति हुई. दोनों देश एक-दूसरे की जेलों में बंद आम क़ैदियों की जल्दी रिहाई के लिए क़दम उठाएँगे. जलसीमा का उल्लंघन करने के कारण पकड़े गए सभी मछुआरों की रिहाई के लिए भी एक तरीक़ा निकालने पर सहमति हुई. निमंत्रण और अगली बातचीत ये भी तय हुआ कि दोनों देशों के बीच समग्र बातचीत के लिए जिन आठ मुद्दों की पहचान की गई थी उनमें से छह मुद्दों पर जुलाई के तीसरे सप्ताह और अगस्त के पहले सप्ताह में बात की जाएगी. ये मुद्दे हैं- सियाचिन, वुलर ब्रिज/तुलबुल परियोजना, सर क्रीक, आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी, आर्थिक और व्यावसायिक सहयोग तथा विभिन्न क्षेत्रों में मित्रवत प्रोत्साहन. इसके बाद अगस्त के तीसरे सप्ताह में दोनों देशों के विदेश सचिव एक बार फिर मिलेंगे और बातचीत की प्रगति की समीक्षा करेंगे. दोनों विदेश सचिव, विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भी खाका तैयार करेंगे जो विदेश सचिवों की बैठक के फ़ौरन बाद होगी. |
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