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आंध्र में राहत पैकेज का उल्टा असर? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आंध्र प्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री वाइएस राजशेखर रेड्डी ने कर्ज़ में डूबे राज्य के किसानों से दोबारा अपील की है कि वे आत्महत्या न करें. पिछले एक सप्ताह में राज्य में सरकार बदलने के बाद से 14 किसानों ने कर्ज़ से तंग आकर आत्महत्या कर ली है जिसके बाद मुख्यमंत्री को अपील दोहरानी पड़ी. ये आत्महत्याएँ पिछले हफ़्ते किसानों के लिए एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा किए जाने के बाद हुई हैं, जिसका अर्थ लगाया जा रहा है कि परिवार के लिए आर्थिक सहायता हासिल करने के लिए कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या का रास्ता चुन रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता राज्य के किसानों की हालत सुधारने की है, राज्य में हाल में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव में आत्महत्या का मामला एक बड़ा चुनावी मुद्दा था. कांग्रेस ने राज्य के किसानों की बुरी हालत के लिए चंद्रबाबू नायडू की सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है. रेड्डी ने सत्ता में आते ही किसानों के लिए एक राहत पैकेज की घोषणा की है, उन्होंने कहा कि इस योजना को जल्द से जल्द लागू कर दिया जाएगा. दस वर्षों के अंतराल के बाद सत्ता में आई कांग्रेस पार्टी का कहना है कि पिछले छह वर्षों में लगभग तीन हज़ार किसानों ने कर्ज़ से तंग आकर आत्महत्या की है. चिंता की बात कुछ अधिकारियों का कहना है कि जब से नए मुख्यमंत्री ने राहत पैकेज की घोषणा की है किसानों के आत्महत्या करने की घटनाएँ बढ़ गई हैं. कुछ लोगों का मानना है कि कर्ज़ उतारने और अपने परिवार का भविष्य बेहतर करने के लिए किसान आत्महत्या का रास्ता अपना रहे हैं. मुख्यमंत्री रेड्डी ने कहा है कि इस बात की छानबीन कराएँगे कि क्या राहत पैकेज का उल्टा असर हो रहा है. राहत योजना के तहत 1999 से अब तक आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को डेढ़ लाख रूपए दिए जाने की घोषणा की गई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत पैकेज के तहत उन किसानों की भी मदद की जाएगी जो कर्ज़ के बोझ तले दबे हैं और जिनके आत्महत्या करने का अंदेशा हो सकता है. |
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