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इस गठबंधन से भी उम्मीद नहीं: चंद्रशेखर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का कहना है कि नई सरकार बनाने के लिए जिस तरह कोशिशें हो रही हैं उससे उन्हें इस गठबंधन से उम्मीद नहीं है. 'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि वैसे तो सरकार अभी बनी नहीं है मगर जो लोग गठबंधन में शामिल होना चाहते हैं उनका रुख़ बहुत अच्छा नहीं है. मगर उन्होंने ये भी कहा कि लोकतंत्र में प्रयोग तो करने ही पड़ते हैं इसलिए कोशिश तो करनी ही चाहिए. सोनिया गाँधी के विदेशी मूल पर भारतीय जनता पार्टी के रुख़ के बारे में उनका कहना था कि भाजपा का रुख़ तो हमेशा से ही ऐसा था मगर अब कुछ ऐसी पार्टियाँ भी नए गठबंधन में शामिल हो रही हैं जो ख़ुद इस विषय पर राय बदलती रही हैं. पूर्व प्रधानमंत्री ने इस नए गठबंधन से ख़ुद को अलग करते हुए गठबंधन सरकारों के बारे में कहा कि जिस तरह कुछ लोग क्षेत्रीय मुद्दों के आधार पर देश चलाना चाहते हैं वह देश के लिए 'अशुभ संकेत' है. उन्होंने कहा कि गठबंधन का नेता जो भी हो उसे फ़ैसले लागू करने की आज़ादी होनी चाहिए. मगर यदि हर क़दम पर लोग हस्तक्षेप करें तो उससे गठबंधन मज़बूत नहीं रह सकता. अगली सरकार की प्राथमिकताओं की चर्चा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार को ग़रीबी और बेरोज़ग़ारी हटाने के साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की आलोचना करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि सरकार चलाना एक बात है और देश चलाना दूसरी बात है. उन्होंने कहा कि पिछले चार साल से जिस तरह सरकार चल रही थी उसके नतीजे अब दिख रहे हैं. राजग की आर्थिक नीतियों को देश के लिए ख़तरनाक बताते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि सरकार ने कोई भी ऐसा क़दम नहीं उठाया जो देश के लिए लाभदायक रहा हो. |
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