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साड़ी वितरण हादसा बना चुनावी मुद्दा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लालजी टंडन के जन्मदिन कार्यक्रम में कुछ लोगों के लिए कफ़न बन गई साड़ियों के मसले ने अब पूरे राजनीतिक माहौल को ही लपेटना शुरू कर दिया है. कोई भी पार्टी इस मसले को छोड़ना नहीं चाहती, आख़िर प्रधानमंत्री के नज़दीक़ी माने जाने वाले नेता को घेरने का मौक़ा ऐसे कैसे छोड़ दिया जाए. कार्यक्रम भले ही चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद हो रहा हो मगर भाजपा का कहना है कि ये कार्यक्रम तो हर साल होता है और कार्यक्रम से पार्टी का सीधे तौर पर कोई लेना-देना भी नहीं था. वैसे भाजपा उन्हें बचाने की कोशिश करे तो समझ में भी आता है मगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का ये बयान की इस घटना में न तो प्रशासन की कोई ग़लती थी और न ही भाजपा नेता टंडन की, तो इसे क्या कहा जाए? तो दूसरे दल समाजवादी पार्टी पर भाजपा से साठ-गाँठ होने का आरोप भला क्यों न लगाएँ आख़िर मौक़ा तो ख़ुद मुलायम सिंह ही दे रहे हैं. कांग्रेस का रोष मगर कांग्रेस ने यादव के इस बयान पर कड़ा रोष व्यक्त किया है. कांग्रेस का कहना है कि धारा 144 लगे होने के बावजूद प्रशासन की अनुमति के बिना भीड़ इकट्ठी करना एक अपराध है और इस स्थिति में ऐसा ही हुआ है.
इससे पहले कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल सेक्यूलर के नेताओं ने चुनाव आयोग को एक ज्ञापन दिया. इसमें कहा गया है कि टंडन के जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम आचार संहिता और क़ानून का खुला उल्लंघन है. उधर मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति मुंबई में थे और उन्होंने इस बारे में कहा है कि अंतिम फ़ैसला आयोग की पूर्ण बैठक के बाद ही लिया जाएगा. उनका कहना था कि तथ्यों की जाँच किए बिना कोई फ़ैसला नहीं लिया जा सकता. वैसे भाजपा को भी घटना की गंभीरता का अंदाज़ा तो है ही इसलिए अब फ़ैसला हुआ है कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जब 15 अप्रैल को नामांकन दाख़िल करेंगे तो इस मौक़े पर बहुत धूम-धड़ाका नहीं किया जाएगा. मगर साथ ही भाजपा का ये भी कहना है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल जो ये आरोप लगा रहे हैं कि टंडन प्रधानमंत्री वाजपेयी के चुनाव एजेंट हैं, वो तकनीकी रूप से ग़लत है. पार्टी प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नक़वी का कहना है कि जब प्रधानमंत्री वाजपेयी ने नामांकन भरा ही नहीं है तो उनके चुनाव एजेंट लालजी टंडन कैसे हो गए? |
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