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जनता करेगी योग्यता का फ़ैसला: राहुल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेहरू-गाँधी परिवार की चौथी पीढ़ी के रूप में राजनीति के मैदान में उतरे राहुल गाँधी का कहना है कि उनकी क्षमता का फ़ैसला जनता करेगी. आत्मविश्वास से भरे राहुल की तमन्ना देश के लिए कुछ कर गुज़रने की है. वैसे ख़ुद राहुल गांधी न तो किसी ग़लतफ़हमी के शिकार हैं और न ही मुंगेरीलाल सरीखे सपने देखने में विश्वास रखते हैं. हां, आत्मविश्वास उनमें ज़रूर है और देश के लिए कुछ करने की तमन्ना भी है, पर अपने समय में. जल्दबाज़ी में वह नहीं लगते और न ही कोई ग़लत कदम उठाकर, औंधे मुँह गिरना चाहते हैं. नेहरू-गाँधी परिवार के तुरुप के पत्ते के तौर पर राजनीति में उतरे राहुल कहते हैं, "मेरे मन में अपने देश के लिए एक सपना है, अपने देश के प्रति कई धारणाएं है और मैं अपने देश की मदद करना चाहता हूँ." उनका कहना है, "मेरा यह मानना है कि मेरी योग्यता और क्षमताओं का फ़ैसला इस देश की जनता करेगी." बीबीसी को दिए गए पहले टीवी साक्षात्कार में राहुल ने कहा कि भारत के लोग इंदिरा गाँधी या राजीव गाँधी को उनके नाम के आगे ‘गाँधी’ लगे होने की वजह से याद नहीं करते, बल्कि उनके कामों की वजह से याद करते हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें लोगों का ज़बर्दस्त समर्थन मिल रहा है. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि लोगों का यह उत्साह राहुल गाँधी के नाम पर नहीं बल्कि उनके पिता राजीव गाँधी के कामों की वजह से मिल रहा है. राहुल ने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि भाजपा और आरएसएस एक विघटनकारी विचारधारा को लेकर चल रहे हैं लेकिन भारत ऐसा देश नहीं है, इस विघटनकारी विचारधारा के ख़िलाफ लोगों की जबर्दस्त प्रतिक्रिया होगी और इनकी नीति इन्हीं पर उल्टी पड़ेगी. 'प्रियंका केवल बहन नहीं' राहुल ने बताया कि प्रियंका केवल उनकी बहन ही नहीं, बल्कि उनकी सबसे अच्छी दोस्त भी हैं और दोनों ने बहुत कठिनाई भरे समय में भी एक दूसरे का साथ दिया और मदद की है.
उनसे ये भी पूछा गया कि ‘प्रियंका या राहुल में से कौन’ से जुड़ी तमाम अटकलों के बाद अब जबकि उनका नाम तय कर लिया गया है, उन्हें कैसा महसूस हो रहा है? राहुल ने कहा कि ‘प्रियंका या राहुल’ जैसी कोई भी बात करना बिल्कुल ग़लत है और न ही ये सवाल कभी उन दोनों के मन में आया है. जब उनसे पूछा गया कि पहले की दुर्घटनाओं को देखकर क्या उन्हें किसी तरह का डर रहीं लगता, तो राहुल ने कुछ भी साफ-साफ नहीं कहा. राहुल से जब पूछा गया कि क्या वे अपने बच्चों को राजनीति में आने की अनुमति देंगे, उन्होंने कहा कि सवाल उनके बच्चों के राजनीति में आने का नहीं है. उन्होंने कहा, "अगर मैं अपने बच्चों में उन्हीं मूल्यों को नहीं उतार पाया, जो मुझे और मेरी बहन को सिखाए गए हैं, तो यह मेरे लिए बहुत दुखद होगा." |
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