|
भाजपा-कांग्रेस की लड़ाई में गर्माहट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चुनावी अभियान जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है दोनों प्रमुख पार्टियाँ किसी न किसी मसले पर एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश में ही लगी हैं. भाजपा का कहना है कि कांग्रेस के पास मुद्दों की कमी है जबकि कांग्रेस भाजपा की विचारधारा को ही लेकर सवाल उठा रही है. इस बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उस बयान पर आपत्ति उठा दी है जिसमें संघ ने वामपंथी दलों पर भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध करने का आरोप लगाया था. आरोपों का पुलिंदा कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल तो संवाददाता सम्मेलन में पूरी तैयारी से आए. आते ही ये पढ़कर सुनाया कि विभिन्न राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में प्रमुख हस्तियों के क्या विचार थे. इनमें महात्मा गाँधी और जयप्रकाश नारायण के विचार दिए गए थे. कांग्रेस ने डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मौत के बारे में भी सवाल उठाए.
कांग्रेस का अगला निशाना था भाजपा का भारत उदय अभियान. सिब्बल ने प्रधानमंत्री के विशेष कार्याधिकारी सुधीन्द्र कुलकर्णी की ओर से प्रसार भारती के प्रमुख को लिखी गई चिट्ठी की प्रति भी दिखाई. इसमें बताया गया है कि किस तरह विभिन्न मंत्रालयों का पैसा इस प्रचार में इस्तेमाल किया गया है. भाजपा का जवाब भाजपा महासचिव प्रमोद महाजन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि महात्मा गाँधी की हत्या का आरोप भाजपा या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगाना ग़लत है क्योंकि उनकी हत्या की जाँच करने वाले आयोग ने किसी भी संगठन पर ऐसा आरोप नहीं लगाया था. महाजन का कहना था कि कांग्रेस के पास तो कोई मुद्दे ही नहीं रह गए हैं. साथ ही यह घोषणा भी की गई कि हरियाणा सरकार के पूर्व मंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल के नेता करतार सिंह भड़ाना भाजपा में शामिल हो गए हैं. सुनवाई टली सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न टेलीविज़न चैनलों पर अलग-अलग ट्रस्टों की ओर से दिखाए जा रहे राजनीतिक विज्ञापनों के मामले पर सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी है. आंध्र प्रदेश सरकार ने चैनलों पर राजनीतिक दलों के विज्ञापन दिखाने पर पाबंदी लगाने से इनकार कर दिया था मगर केंद्र सरकार ने इसके विरोध में एक याचिका दायर की है. मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीएन खरे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ कर रही है. उल्लेखनीय है कि 'साझी विरासत ट्रस्ट' और 'कामाक्षी एजुकेशन ट्रस्ट' नाम की दो संस्थाएँ इस तरह के प्रचार कर रही हैं जिनमें से एक भाजपा का और दूसरा कांग्रेस का समर्थन करता है. माकपा की आपत्ति माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने संघ प्रवक्ता राम माधव की टिप्पणी के बारे में कहा कि वामपंथी दलों को गाँधी के हत्यारों और ब्रितानी शासन से बार-बार माफ़ी माँगने वालों से कोई प्रमाण पत्र नहीं चाहिए. येचुरी का कहना था कि आज़ाद हिंद फ़ौज में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की सहयोगी रही कैप्टन लक्ष्मी सहगल जैसी कई हस्तियों ने अकारण ही नहीं माकपा से जुड़ना पसंद किया. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||