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वाजपेयी के गुण गाते रहेंगे रवीन्द्र जैन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़िल्म जगत की जानी-मानी हस्तियों को चुनाव प्रचार के लिए बुलाने या पार्टी में शामिल कराने का कांग्रेस का एक दाँव उसी पर उल्टा पड़ गया. हुआ यूँ कि कांग्रेस ने जाने-माने संगीतकार और धारावाहिक 'रामायण' में गीत गा चुके रवीन्द्र जैन के पार्टी में शामिल होने की घोषणा करने के लिए एक संवाददाता सम्मेलन बुलाया. उस मंच पर जैन ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तारीफ़ कर दी. इतना ही नहीं उन्होंने तो यहाँ तक कहा कि वह विश्व हिंदू परिषद और शिव सेना के लिए भी गाते रहेंगे. बस फिर क्या था जब बात यहाँ तक पहुँची तो जैन को मंच तक लाने वाले पार्टी नेता सलमान ख़ुर्शीद बगलें झाँकने लगे. 'फ़ोन आया था' पार्टी में शामिल होने के लिए जैन कांग्रेस कार्यालय क़रीब आधे घंटे देरी से पहुँचे. बस देर होनी थी कि अफ़वाहों का बाज़ार गर्म हो गया. अटकलें लगने लगीं कि प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें फ़ोन किया गया है. इस बारे में पूछे जाने पर उनका कहना था, "जी फ़ोन तो आया था और यह पहली बार नहीं है वाजपेयी जी से तो पहले भी बात हुई है." कांग्रेस पार्टी को उस समय तो और भी झटका लगा जब उन्होंने कहा कि वह भाजपा के लिए अब भी गीत लिख सकते हैं. जैन का कहना था कि वाजपेयी का व्यक्तित्व काफ़ी विशाल है और उनको लेकर तो कोई विवाद ही नहीं है. उन्होंने तो ये भी कहा कि वह शाम को शिवसेना नेता मनोहर जोशी के कार्यक्रम में भी हिस्सा लेने जा रहे हैं. उल्टा दाँव प्रेक्षक मान रहे हैं कि जैन को कांग्रेस पार्टी में शामिल करने का पार्टी का दाँव उसी पर उल्टा पड़ गया है. इससे अब इन फ़िल्मी हस्तियों के पार्टियों में शामिल होने पर सवालिया निशान भी लगने लगे हैं. लोगों का कहना है कि इन्हें तो ये भी नहीं पता कि वे विभिन्न राजनीतिक दलों में शामिल क्यों हो रहे हैं? अटकलें तो ये भी गर्म हैं कि इन सभी को चुनाव प्रचार के लिए मोटी रक़म दी जा रही है. |
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