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मेधा पाटकर का संगठन अब राजनीति में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इस साल के आम चुनावों के लिए अब जन आंदोलनों में सक्रिय संगठनों ने भी आगे बढ़ना शुरू कर दिया है. नेशनल अलायंस आफ़ पीपुल्स मूवमेंट्स यानी राष्ट्रीय जन आंदोलन गठबंधन ने अब अपना राजनीतिक मोर्चा बनाया है. पीपुल्स पोलिटिकल फ्रंट (पीपीएफ़) यानी जनवादी राजनीतिक मोर्चा इस साल के आम चुनाव में उतर सकता है. जैसा कि कहा गया है, अगर ऐसा नहीं हुआ तो मोर्चे की राजनीतिक पारी महाराष्ट्र विधान सभा चुनावों से शुरू होगी. नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता और समाज सेवी मेधा पाटकर का कहना था कि पीपीएफ़ मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है. उनका कहना था कि पीपीएफ़ देश की पार्टी आधारित राजनीतिक व्यवस्था के एक विकल्प के रूप में काम करेगा और आम लोगों से जुड़े तमाम मुद्दों को राजनीतिक पटल पर रखने की कोशिश करेगा. मेधा पाटकर का कहना था, "पीपीएफ़ सिर्फ़ किसी एक मुद्दे पर ध्यान नहीं देगा बल्कि यह सम्मानजनक और लोकतांत्रिक राजनीति और समान तथा टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों को साथ लेकर चलेगा." "ऐसे में जबकि सार्वजनिक क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोला जा रहा है और तमाम विकास नीतियाँ और योजनाएँ रोज़गार के अवसरों को न सिर्फ़ कम कर रही हैं बल्कि बिल्कुल ख़त्म कर रही हैं, तो लड़ाई सड़कों से उठकर राजनीतिक मोर्चे पर आनी चाहिए." राजनीतिक संघर्ष सरदार सरोवर बाँध विरोधी आंदोलन से जुड़ीं मेधा पाटकर का कहना था कि पीपीएफ़ ऐसी सांप्रदायिक और भ्रष्ट ताक़तों के ख़िलाफ़ संघर्ष करेगा जिन्होंने देश की राजनीति को दाग़दार बना दिया है."
"हम धर्मनिर्पेक्ष ताक़तों से अनुरोध करते हैं कि वे सांप्रदायिक ताक़तों का मुक़ाबला करने के लिए बिना किसी देरी के एकजुट हो जाएं." पाटकर ने बताया कि पीपीएफ़ का राजनीतिक घोषणा-पत्र जल्दी ही जारी कर दिया जाएगा. एक समिति इस घोषणा-पत्र को अंतिम रूप दे रही है और मैगसैसे पुरस्कार प्राप्त अरूणारॉय इस समिति की संयोजक हैं. मेधा पाटकर ने कहा कि उन्होंने इस बारे में अभी कोई फ़ैसला नहीं किया है कि वे ख़ुद चुनाव लड़ेंगी या नहीं. |
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