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लोकसभा भंग, चुनाव का रास्ता साफ़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने 13वीं लोकसभा भंग कर दी है. इसके साथ ही लोकसभा चुनाव का रास्ता साफ हो गया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पहले ही इसकी सिफ़ारिश कर दी थी. 13वीं लोकसभा अपने कार्यकाल से छह महीने पहले भंग की गई है. दरअसल विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद से अटल बिहारी वाजपेयी की अगुआई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने जल्दी चुनाव का मन बना लिया था. चुनाव आयोग जल्द ही बैठक करके अगले लोकसभा चुनाव की तारीख़ों के बारे में फ़ैसला करेगी. वैसे आकलन यह है कि चुनाव अप्रैल में कराए जाएँगे. राजग में प्रमुख घटक दल भारतीय जनता पार्टी को काँग्रेस शासित तीन राज्यों छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश में जीत हासिल हुई थी. तैयारियाँ इसके बाद से ही अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं. गुरुवार को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अगुआई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दलों की बैठक हुई जिसमें संयुक्त घोषणापत्र के बारे में चर्चा हुई और यह फ़ैसला हुआ कि विकास को ही मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा.
दूसरी ओर विधानसभा चुनाव में हार के बाद नए साथी तलाश रही काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को खाने पर बुलाया. भाजपा और काँग्रेस दोनों नए साथी तलाश कर रही हैं. सबसे रोचक स्थिति तमिलनाडु की है. जहाँ द्रमुक और अन्नाद्रमुक एक बार भाजपा के साथ तो दूसरी बार काँग्रेस के पाले में आ जाते हैं. इस बार द्रमुक चुनाव से पहले ही राजग से हाथ झटककर काँग्रेस के साथ खड़ा है. तो अन्नाद्रमुक भाजपा के साथ. सबसे ज़्यादा लोकसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह की भाजपा में वापसी से राजनीतिक समीकरण रोचक हुए हैं. काँग्रेस के लिए भी यही राज्य सबसे बड़ा सिरदर्द है. क्योंकि मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी एक-दूसरे को साथ-साथ देखना नहीं चाहते. काँग्रेस दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश में है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार देश में कथित 'फ़ील गुड' माहौल का भरपूर फ़ायदा उठाना चाहती है. |
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