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जल्दी चुनाव के फ़ैसले पर विपक्ष नाख़ुश
भारत के मुख्य विपक्षी दल काँग्रेस ने जल्दी चुनाव कराने के भारतीय जनता पार्टी सरकार के फ़ैसला पर कड़ा ऐतराज़ जताया है. काँग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के इस फ़ैसले को "सिद्धांतहीन अवसरवाद" की संज्ञा दी है. काँग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जल्दी चुनाव कराने की मंशा ज़ाहिर करके देश की संवैधानिक परंपराओं को तोड़ा है. उन्होंने कहा, "लोक सभा को भंग करना प्रधानमंत्री का विवेकाधिकार है लेकिन हम सवाल इस पर उठा रहे हैं कि भाजपा ने इस समय हद दर्जे के अवसरवाद का परिचय दिया है." हालाँकि उन्होंने कहा कि काँग्रेस चुनाव के लिए किसी भी समय तैयार है और पार्टी ने चुनाव की तैयारियाँ भी शुरू कर दी हैं. वामपंथी देश के वामपंथी दलों ने इस फ़ैसले पर भाजपा की आलोचना की है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "यह उनकी कमज़ोरी की एक निशानी है."
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता एबी बर्धन ने कहा कि इससे पहले कभी ऐसे समय लोक सभा भंग नहीं की गई जब कोई एक दल यह सोचता हो कि चुनाव जीतने का उसके लिए कोई अच्छा मौक़ा हो. "आख़िर वे किस दलील के साथ जल्दी चुनाव करा रहे हैं. संसद में वाजपेयी के बहुमत को कोई चुनौती नहीं है और देश को भी कहीं से कोई ख़तरा नहीं है." ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सोमवार को हैदराबाद में पार्टी कार्यकारिणी की बैठक में कहा था कि वे लोक सभा चुनाव अप्रैल में चाहते हैं. वैसे मौजूदा लोक सभा का कार्यकाल अक्तूबर में ख़त्म होगा. हालाँकि सरकार लोक सभा भंग करके जल्दी चुनाव कराने की घोषणा कर सकती है लेकिन चुनाव कब होंगे इस बारे में अंतिम फ़ैसला चुनाव आयोग को करना है. और चुनाव आयोग चुनाव की अंतिम तैयारियाँ तभी शुरू करेगा जब सरकार लोक सभा भंग करने की सिफ़ारिश राष्ट्रपति से कर दे. |
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