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एनडीए और काँग्रेस की चुनावी सरगर्मियाँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में लोकसभा चुनावों से संबंधित सरगरमियाँ तेज़ हो गई हैं. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने केंद्र में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के सांसदों को संबोधित किया है. उन्होंने राजनीतिक स्थिरता और विकास पर ज़ोर दिया है और इन मुद्दों को मतदाताओं के बीच ले जाने की बात कही. महत्वपूर्ण है कि इस बैठक में जयललिता की पार्टी ऑल इंडिया अन्ना द्रमुक के नेता भी शामिल थे. दूसरी ओर, काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात की है. उन्होंने काँग्रेस के कार्यकर्ताओं से आहवान किया कि एनडीए के कथित कुशासन और कमज़ोरियों को जनता के सामने लाया जाए. 'फ़ील गुड' बनाम 'कुशासन'
समाचार एजेंसियों के अनुसार प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि पूरे देश में जो 'फ़ील गुड' यानी ख़ुशहाली का महौल है, उसे आने वाले चुनावों में मतों में परिवर्तित करना होगा. उनका दावा था कि चुनाव चाहे समय से पाँच महीने पहले करवाए जा रहे हैं लेकिन एनडीए सरकार सत्ता में वापस आएगी. प्रधानमंत्री वाजपेयी ने कहा कि गठबंधन सरकार के बावजूद सरकार ने राजनीतिक स्थिरता प्रदान की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की छवि को बेहतर किया. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कई मंत्रियों और एनडीए के संयोजक जॉर्ज फ़र्नंडिस की भी प्रशंसा की. काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी की बुलाई बैठक और भोज में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के नेता भी शामिल थे. उन्होंने कहा कि काँग्रेस कई राज्यों में कई राजनीतिक दलों से गठबंधन करने के लिए बातचीत कर रही है लेकिन ये गठबंधन नीतियों और कार्यक्रम के आधार पर ही होंगे. उन्होंने गठबंधन सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा को कमज़ोर करने का आरोप लगाया. सोनिया गाँधी का आरोप था कि भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात में दंगों के समय विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के नफ़रत फैलाने पर रोक न लगाकर सामाजिक ढाँचे को नुकसान पहुँचाया है. |
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