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चुनाव पूर्व लोकसभा का अंतिम सत्र
भारत में वर्तमान लोकसभा का अंतिम सत्र गुरूवार को शुरू हुआ और दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया. ये विशेष सत्र लेखानुदान पारित करवाने के लिए बुलाया गया है जिससे आम चुनाव का रास्ता साफ़ किया जा सके. ये शीतकालीन सत्र तेरहवीं लोकसभा का अंतिम सत्र है. सत्र पाँच फ़रवरी तक चलेगा और प्रधानमंत्री वाजपेयी ने राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से इसके एक दिन बाद छह फ़रवरी को लोकसभा को भंग करने की सिफ़ारिश की है. रेल लेखानुदान 30 जनवरी और आम लेखानुदान लोकसभा में तीन फ़रवरी को पेश किया जाएगा. लेखानुदान को राज्यसभा से भी पारित करवाया जाना है जिसके लिए चार फ़रवरी को राज्यसभा का सत्र बुलाया गया है. वाजपेयी सरकार के समय से पहले चुनाव करवाने के फ़ैसले के कारण अभी बजट पेश नहीं किया जा सकता इसलिए सरकारी ख़र्च के लिए लेखानुदान पास करवाया जा रहा है. आपत्ति मुख्य विपक्षी पार्टी काँग्रेस ने विशेष सत्र बुलाए जाने पर आपत्ति जताई है. विपक्षी नेता सोनिया गाँधी ने राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा है जिसमें वाजपेयी सरकार के फ़ैसले को 'संविधान के साथ अनुचित बर्ताव' बताया गया है. पार्टी प्रवक्ता एस जयपाल रेड्डी ने कहा है कि काँग्रेस सत्र के दौरान सत्ताधारी गठबंधन के ग़लत काम-काज का पर्दाफ़ाश करेगी. वाजपेयी सरकार में संसदीय मामलों की मंत्री सुषमा स्वराज ने काँग्रेस की आपत्ति को नकारते हुए कहा है कि सत्र संविधान के नियमों के तहत ही बुलाया गया है. |
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