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"जैश कश्मीर में लड़ाई जारी रखेगा"
चरमपंथी इस्लामी संगठन जैशे मोहम्मद ने चेतावनी दी है कि वह भारत और पाकिस्तान के बीतचीत बहाल करने के फ़ैसले के बावजूद कश्मीर में अपना जेहाद जारी रखेगा. जैशे मोहम्मद भारतीय कश्मीर में भारतीय शासन की समाप्ति के लिए सशस्त्र अभियान चला रहा है. पाकिस्तान में प्रतिबंधित संगठन जैशे मोहम्मद के एक प्रवक्ता मोहम्मद हसन बरकी ने बुधवार को कहा कि कश्मीर मुद्दे का तब तक कोई समाधान नहीं हो सकता जब तक कि कश्मीरियों को बातचीत में शामिल नहीं किया जाता. भारत जैशे मोहम्मद और लश्करे तैबा को उसकी संसद पर 2001 में हुए चरमपंथी हमले के लिए दोषी बताता है. इन दोनों संगठनों को अमरीका भी 'आतंकवादी गुट' घोषित कर चुका है और भारतीय संसद पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान में भी इन पर पाबंदी लगा दी गई.
बरकी ने कहा कि उनकी संगठन भारत प्रशासित कश्मीर में संघर्षविराम को तभी मान्यता देगा जब भारत सरकार कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र माने और वहाँ से अपनी सेनाएं हटाए, कश्मीरियों का दमन रोके, कश्मीरी क़ैदियों को रिहा करे और त्रिपक्षीय बातचीत के लिए राज़ी हो. "इस बातचीत में भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ कश्मीरियों को भी जगह दी जाए." जैशे मोहम्मद के प्रवक्ता मोहम्मद बरकी ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के इस आहवान को भी नकार दिया कि उनकी सरकार 'आतंकवादी गतिविधियों' के लिए देश की ज़मीन का इस्तेमाल नहीं होने देगी. उन्होंने कहा, "कश्मीर की लड़ाई एक दमन के ख़िलाफ़ जेहाद है." बरकी ने कहा कि जैशे मोहम्मद ने अपनी गतिविधियों के लिए कभी भी पाकिस्तानी ज़मीन का इस्तेमाल नहीं किया बल्कि उसके अड्डे भारत प्रशासित कश्मीर में ही है जहाँ से वह अपनी गतिविधियाँ चलाता है. इससे पहले कुछ कश्मीरी गुटों के बड़े संगठन यूनाइटेड जेहाद काउंसिल के मुखिया सैयद सलाहुद्दीन ने बातचीत बहाल करने के भारत और पाकिस्तान के फ़ैसले का स्वागत तो किया था लेकिन कहा था कि कश्मीर में उनकी लड़ाई जारी रहेगी. |
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