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आगरा से इस्लामाबाद तक
भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की मुलाक़ात ढाई साल पहले आगरा में हुई थी. आगरा शिखर बैठक नाकाम रही थी. उसके बाद दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ते चले गए, ख़ासकर दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हुए चरमपंथी हमले के बाद. लेकिन वर्ष 2003 में फिर से दोनों देशों के संबंध सुधरने शुरू हुए. बस और हवाई सेवा बहाल हो चुकी है. दोनों देशों के उच्चायुक्त एक बार फिर अपना काम संभाल चुके हैं. और भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तमाम अटकलों के बावजूद पाकिस्तान जाकर सार्क शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया है और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से मुलाक़ात भी की है. आइए नज़र डालें जुलाई 2001 में आगरा में हुई शिखर बैठक के बाद की घटनाओं पर. 13 दिसंबर 2001: भारतीय संसद पर चरमपंथी हमले में 14 लोग मारे गए जिनमें पाँच चरमपंथी भी शामिल थे. इस घटना के बाद दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गए. एक बार तो युद्ध की नौबत भी आ गई.
14 मई 2002: चरमपंथियों ने जम्मू के कालूचक में सेना के शिविर पर हमला किया जिसमें 35 लोग मारे गए. मृतकों में ज़्यादातर महिलाएँ और बच्चे थे. इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा. 4 जून 2002: प्रधानमंत्री वाजपेयी और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ कज़ाख़स्तान की राजधानी अलमाती में क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने गए. लेकिन मिले नहीं. प्रधानमंत्री वाजपेयी ने सीमा पर संयुक्त गश्त की पेशकश की लेकिन पाकिस्तान ने उसे ठुकरा दिया. 10 जून 2002: भारत ने यह मानते हुए कि 'सीमा पार घुसपैठ' में कमी आई है, पाकिस्तानी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से उड़ने पर लगी पाबंदी हटाई. कई पश्चिमी देशों के नेताओं के प्रयासों के बाद तनाव में भी कुछ कमी आई लेकिन पाकिस्तान ने भारतीय विमानों पर से पाबंदी हटाने से मना कर दिया. भारतीय विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा और पाकिस्तान के विदेश उप मंत्री इनामुल हक़ काठमांडू में एक सार्क बैठक में शामिल हुए लेकिन दोनों के बीच बातचीत नहीं हुई. 14 नवंबर 2002:भारत ने सीमा पर से अपने अतिरिक्त सैनिकों को हटाया जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव में कुछ कमी आई. 9 दिसंबर 2002:पाकिस्तान ने जनवरी 2003 में इस्लामाबाद में होने वाली सार्क शिखर बैठक रद्द की. पाकिस्तान ने इसके लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराया. 24 फरवरी 2003:राष्ट्रपति मुशर्रफ़ और प्रधानमंत्री वाजपेयी मलेशिया में गुटनिरपेक्ष देशों के शिखर सम्मेलन में शामिल हुए. दोनों नेताओं ने कश्मीर के मुद्दे पर एक-दूसरे के रुख़ की आलोचना की.
6 मई 2003:प्रधानमंत्री जमाली ने वाजपेयी की पहल का स्वागत किया और परिवहन संपर्क और खेल संबंध बहाल करने की पेशकश की. 30 जून 2003:पाकिस्तान ने क़रीब एक साल बाद अपने नए उच्चायुक्त अज़ीज़ अहमद ख़ान को नई दिल्ली भेजा. 11 जुलाई 2003: 18 महीने बाद दिल्ली-लाहौर बस सेवा शुरू हुई. 15 जुलाई 2003:भारत ने शिवशंकर मेनन को पाकिस्तान में उच्चायुक्त बनाकर भेजा. 1 दिसंबर 2003:भारत और पाकिस्तान एक जनवरी से हवाई संपर्क शुरू करने पर राज़ी हुए. 4 दिसंबर 2003:प्रधानमंत्री वाजपेयी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जमाली को पत्र लिखकर अपने इस्लामाबाद आने की पुष्टि की. पाकिस्तान ने इसका स्वागत किया. 19 दिसंबर 2003:भारत और पाकिस्तान 15 जनवरी से समझौता एक्सप्रेस रेल सेवा बहाल करने पर सहमत हुए. 25 दिसंबर 2003:प्रधानमंत्री वाजपेयी ने कहा कि सार्क शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच नज़दीकी संबंधों की एक शुरुआत हो सकता है. 31 दिसंबर 2003: भारत ने परिवहन संपर्क और राजनयिक संबंध बढ़ाने की पेशकश की. 4 जनवरी 2004: सार्क शिखर सम्मेलन इस्लामाबाद में शुरू हुआ. प्रधानमंत्री वाजपेयी और प्रधानमंत्री जमाली के बीच सीधी बातचीत भी हुई. 5 जनवरी 2004:प्रधानमंत्री वाजपेयी और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के बीच एक घंटे तक बातचीत हुई. |
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