|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क्या सीधी बातचीत संभव हो पाएगी?
सार्क के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी बातचीत होगी या नहीं? यह एक ऐसा सवाल है जो किसी के होठों पर है तो किसी के मन में. देखा जाए तो भारत ने ऐसी किसी बातचीत की संभावना से पूरी तरह इनकार भी नहीं किया है. विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा से ये सवाल बार-बार पूछा गया और उनका जवाब होता है-अभी कुछ तय नहीं है. प्रधानमंत्री को आने तो दीजिए. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शनिवार शाम को इस्लामाबाद पहुँच रहे हैं. बीबीसी न्यूज़ ऑनलाइन के संजय मज़ुमदार का कहना है कि अगर सीधी बातचीत होती है तो राष्ट्रपति मुशर्रफ़ और प्रधानमंत्री वाजपेयी, दोनों की स्थिति इस समय काफ़ी मज़बूत है. कट्टरपंथियों का विरोध वाजपेयी हाल के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के बेहतर प्रदर्शन से आश्वस्त हैं तो मुशर्रफ़ को हाल ही में संसद का विश्वासमत हासिल हुआ है. लेकिन, जैसाकि बीबीसी संवाददाता का कहना है, दोनों नेताओं को अपने-अपने देशों में कट्टरपंथियों की पैनी नज़रों का सामना करना पड़ रहा है जो उनके परंपरा से हट कर उठाए गए किसी भी क़दम का विरोध करेंगे. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ हाल ही में हत्या के दो विफल प्रयास झेल चुके हैं जिनके लिए कट्टरपंथी इस्लामी गुटों को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है. उधर, प्रधानमंत्री वाजपेयी शायद ऐसा कोई क़दम नहीं उठाना चाहेंगे जिनका उनके राजनीतिक विरोधी चुनाव के दौरान फ़ायदा उठा सकें. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||