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सोमवार, 03 नवंबर, 2003 को 10:00 GMT तक के समाचार
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अफ़ग़ानिस्तान में नए संविधान का मसौदा
राष्ट्रपति करज़ई
संविधान का मसौदा राष्ट्रपति करज़ई, ज़हीर शाह और लखदर ब्राहमी को सौंपा गया

अफ़ग़ानिस्तान में नए संविधान के मसौदे में राष्ट्रपति के नेतृत्व वाली सरकार का प्रस्ताव रखा गया है.

नए संविधान का मसौदा सोमवार को सरकार को सौंप दिया गया है जिसे राष्ट्रपति हामिद करज़ई, पूर्व शासक ज़हीर शाह और संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान के विशेष दूत लख़दर ब्राहमी ने स्वीकार किया.

तय कार्यक्रम के मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान में अगले साल चुनाव होने हैं.

संविधान के मसौदे में देश की राजनैतिक व्यवस्था और इस्लाम की भूमिका की भी चर्चा की गई है.

मसौदे में यह भी प्रस्ताव है कि देश का नाम इस्लामी गणराज्य अफ़ग़ानिस्तान रखा जाए.

संविधान आयोग के एक सदस्य ने समाचार एजेंसी रॉयटर को बताया कि मसौदे में मज़बूत राष्ट्रपति प्रणाली का प्रस्ताव रखा गया है.

उन्होंने बताया कि मसौदे में यह सिफ़ारिश की गई है कि देश का राष्ट्रपति जनता के ज़रिए चुना जाए और प्रधानमंत्री का कोई पद न हो.

देश की संसद लोया जिरगा को दिसंबर में संविधान को आख़िरी रूप देना है ताकि अगले साल चुनाव समय पर हो सके.

इस्लामी सिद्धांत

जानकारों का कहना है कि देश का नाम इस्लामी गणराज्य अफ़ग़ानिस्तान रखने के पीछे यही मंशा है कि इस्लाम के झंडे तले देश को एकजुट रखा जा सके.

लेकिन तालेबान शासन के कड़े क़ानूनों को इस मसौदे में जगह नहीं मिली है.

संविधान आयोग ने एक बयान में कहा, "संविधान का मसौदा इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार है और यह स्पष्ट करता है कि कोई भी क़ानून इस्लाम के ख़िलाफ़ नहीं हो सकता."

इस्लाम की भूमिका

 संविधान का मसौदा इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार है और यह स्पष्ट करता है कि कोई भी क़ानून इस्लाम के ख़िलाफ़ नहीं हो सकता

संविधान आयोग

लेकिन बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दूसरे धर्मों को मानने वालों के लिए भी धार्मिक स्वतंत्रता रहेगी.

मसौदे में राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति के पद की तो बात है लेकिन प्रधानमंत्री का पद नहीं रखा गया है.

पूर्व शासक ज़हीर शाह ने मसौदे के बारे में कहा, "मुझे उम्मीद है कि लोग नए संविधान को स्वीकार करेंगे और इससे जनता शांति, सुरक्षा और लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ सकेगी."

संविधान के मसौदे में राजनीतिक दलों के गठन की बात कही गई है लेकिन शर्त यह है कि वे इस्लाम के सिद्धांतों का उल्लंघन न करें और न ही उनकी कोई सैनिक महत्वाकांक्षा हो.

मसौदे में यह भी कहा गया है कि राजनैतिक दलों का दूसरे देशों से कोई संबंध नहीं होना चाहिए.

पश्तो और दारी को देश की आधिकारिक भाषा बनाया गया है लेकिन राष्ट्रीय गीत पश्तो में गाया जाएगा.

संविधान के मसौदे में 12 अध्याय और 160 अनुच्छेद हैं.

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