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पत्रकार के सम्मान में जूते की कलाकृति
जूते का स्मारक
इराक़ के दिवंगत शासक सद्दाम हुसैन के शहर तिरकित में यह स्मारक बनाया गया है
अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर जूता फेंकनेवाले पत्रकार को सम्मान देने के लिए इराक़ में एक जूते की कलाकृति बनाकर लगाई गई है.

गुरुवार को इराक़ के दिवंगत शासक सद्दाम हुसैन के शहर तिरकित में इस सोफ़े के आकार के जूते का उदघाटन हुआ. इस जूते का रंग तांबाई है और इसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन के लिए रखा गया है.

ग़ौरतलब है कि पिछले महीने यानी दिसंबर 2008 में मुंतज़र अल ज़ैदी नाम के एक पत्रकार ने बग़दाद में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति के ऊपर अपने दोनों जूते बारी-बारी से चलाए थे.

हालांकि ये जूते बुश को लग नहीं पाए पर अरब संस्कृति में किसी व्यक्ति को जूता दिखाना तक अपमानजनक माना जाता है. बाद में ज़ैदी को गिरफ़्तार कर लिया गया.

जूता फेंकने की घटना उस समय हुई जब जॉर्ज बुश इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी के साथ प्रेस कॉफ़्रेंस कर रहे थे.

तभी इराक़ी टेलीविज़न पत्रकार मुंतज़र अल ज़ैदी ने गालियाँ देते हुए बुश की ओर एक जूता फेंका. इसके तुरंत बाद ज़ैदी ने दूसरा जूता भी उनकी ओर फेंका.

दर्द और विरोध

पहला जूता फेंकते समय ज़ैदी ने बुश से कहा, "ये इराक़ी लोगों की ओर से आपको आख़िरी सलाम है."

पत्रकार मुंतज़र ज़ैदी अल बग़दादिया टीवी के लिए काम करते हैं

दूसरा जूता फेंकते समय इराक़ी पत्रकार ने चिल्लाते हुए कहा, "ये इराक़ की विधवाओं, अनाथों और मारे गए सभी लोगों के लिए है."

घटना के बाद से ज़ैदी इराक़ सरकार की हिरासत में सुनवाई का इंतज़ार कर रहे हैं. पर इस घटना के बाद मुंतज़र ज़ैदी इराक़ी और अरब जनता के बीच हीरो बन गए हैं और उनकी रिहाई की माँग करते हुए कई प्रदर्शन हो चुके हैं.

अब इस जूते जैसी कलाकृति को बनाने वाले कलाकार लाइथ अल अमरी ने इसके बारे में बताया कि यह कोई राजनीतिक मकसद से किया गया काम नहीं बल्कि हर इराक़ी के लिए गर्व महसूस करने का एक ज़रिया है.

इस कलाकृति के उदघाटन के मौके पर क़रीब 400 लोग जमा हुए. एक बड़े से आधार पर यह कलाकृति लगाई गई है. सफेद रंग के आधार पर एक कविता लिखी गई है जिसमें पत्रकार ज़ैदी की तारीफ़ की गई है.

ज़ैदीशरण चाहते हैं ज़ैदी
ख़बरों के मुताबिक बुश पर जूता फेंकने वाले पत्रकार ने स्विट्ज़रलैंड में शरण माँगी.
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