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ग़ज़ा: युद्धविराम पर ठोस प्रगति नहीं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हमास ने कहा है कि ग़ज़ा में युद्धविराम के लिए मिस्र के अधिकारियों के साथ वार्ता में प्रगति हुई है. इस बीच इसराइल और हमास के बीच जारी संघर्ष में मरने वालों की संख्या एक हज़ार को पार कर गई है. हमास के एक प्रवक्ता ने पत्रकारों से कहा कि वार्ता आगे बढ़ी है लेकिन उन्होंने विस्तार से कुछ भी बताने से इनकार कर दिया. बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक मिस्र हमास पर तो दबाव डाल सकता है लेकिन इसराइल को दबाव में लाने के लिए अमरीका को आगे आना पड़ेगा. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने काहिरा में युद्धविराम पर बातचीत की. हालाँकि वो हमास प्रतिनिधियों से नहीं मिले. गुरुवार को बान की मून यरूशलम पहुँच रहे हैं और उम्मीद की जा रही है कि वो इसराइली अधिकारियों के साथ बात करेंगे. अनेक पश्चिमी देशों की तरह संयुक्तराष्ट्र की घोषित नीति है कि वह हमास से तब तक संपर्क नहीं रखेगा, जब तक कि वह इसराइल को मान्यता नहीं देता. बान की मून की कोशिश बान की मून ने उम्मीद व्यक्त की है, कि मिस्र की मध्यस्थता में जारी संघर्षविराम प्रयासों का शीघ्र ही कोई हल निकलेगा. मध्य-पूर्व दौरे के पहले चरण में काहिरा पहुँचने पर उन्होंने कहा, "आपको मेरा पूर्ण समर्थन है. तत्काल संघर्षविराम कराने के लिए, और मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए संयुक्तराष्ट्र महासचिव के रूप में मुझसे जो कुछ भी संभव हो सकेगा मैं करूँगा." इस बीच इसराइल की ओर से मुख्य वार्ताकार अमोस गिलाड के गुरुवार को काहिरा पहुँचने की उम्मीद है. मिस्र के अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद हमास का कहना था कि ग़ज़ा से इसराइली सैनिकों को निकालने और सीमा चौकियों को खोले जाने के संबंध में अच्छी प्रगति हुई है. लेकिन शांति प्रयासों पर नज़र रखने वाले कुछ विश्लेषकों का मानना है कि संघर्षविराम के लिए दोनों पक्षों को राज़ी करना आसान काम नहीं है, क्योंकि इसराइल और हमास दोनों अपनी-अपनी शर्तों पर संघर्षविराम चाहते हैं. अपनी-अपनी शर्तें इसराइल चाहता है कि हमास की सैनिक ताक़त ख़त्म कर दी जाए, जबकि हमास चाहता है कि किसी तरह का संघर्षविराम लागू होने से पहले ग़ज़ा की नाकेबंदी समाप्त हो. ऐसे में मध्य-पूर्व के लिए विशेष अंतरराष्ट्रीय दूत टोनी ब्लेयर का ये कहना महत्वपूर्ण है कि अगले अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के लिए आर्थिक संकट के बाद सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा होगा मध्य-पूर्व का संकट. अमरीकी रेडियो नेटवर्क एनपीआर से बातचीत में ब्लेयर ने कहा, "ओबामा और हिलरी क्लिंटन से बातचीत के बाद मुझे कोई संदेह नहीं है कि वे इस समस्या पर पूरा ध्यान देंगे. आर्थिक चुनौतियों से निबटने के साथ-साथ उन्हें इस मुद्दे पर भी ध्यान देना ही होगा." उधर इस्तांबुल में आयोजित बैठक में 20 से ज़्यादा मुस्लिम देशों की संसद के स्पीकरों ने ग़ज़ा पर हमले के लिए इसराइल को जम कर निंदा की है. इस बीच ग़ज़ा में इसराइली हमले में मरने वाले फ़लस्तीनियों की संख्या एक हज़ार को पार कर गई है. |
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