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मृतकों की संख्या एक हज़ार से ज़्यादा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी चिकत्सीय सूत्रों के मुताबिक ग़ज़ा में मरने वालों की संख्या एक हज़ार से ज़्यादा हो गई है और करीब पाँच हज़ार लोग घायल हैं. बताया जा रहा है कि मरने वालों में से एक तिहाई बच्चे हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि वो फ़लस्तीनी लड़ाकों और इसराइल के बीच संघर्षविराम करवाना चाहते हैं जो स्थाई हो. बान की मून मध्य पूर्व के दौरे पर हैं लेकिन उनके बयान के बावजूद ग़ज़ा में संघर्ष और तेज़ होता जा रहा है. ग़ज़ा में स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 19 दिन पहले शुरु हुए संघर्ष में 1010 लोग मारे गए हैं जबकि 13 इसराइली मारे गए हैं जिनमें 10 सैनिक और तीन नागरिक शामिल हैं. हालांकि इस संख्या की स्वतंत्र सूत्रों से पुष्टि नहीं हो पाई है क्योंकि इसराइल ने ग़ज़ा में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को जाने की अनुमति नहीं दी है. उधर बान की मून ने मिस्र के राष्ट्रपति हुसनी मुबारक से मुलाकात के बाद उम्मीद जताई है कि मिस्र के कूटनीतिक प्रयासों के नतीजे जल्द ही देखने को मिलेंगे. संघर्षविराम का दवाब बान की मून जॉर्डन, इसराइल, सीरिया और पश्चिमी तट भी जाएँगे. मिस्र दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम करवाने की कोशिशों में लगा हुआ है. इसमें उसकी सीमा के ज़रिए ग़ज़ा में हथियारों की तस्करी रोकने के लिए शांतिबल तैनात करना शामिल है. ख़बरों के मुताबिक मिस्र के वार्ताकार हमास पर दवाब डाल रहे हैं कि वो संघर्षविराम के लिए तैयार हो जाए. हमास के प्रवक्ता ने कहा है कि अगर संघर्षविराम करना है तो इसराइली हमले बंद होने चाहिए, इसराइली सेना को पूरी तरह हटना होगा और ग़ज़ा की नाकेबंदी ख़त्म होनी चाहिए. इसराइल ने 27 दिसंबर 2008 को ग़ज़ा के ख़िलाफ़ अभियान शुरु किया था. उसका कहना था कि वो ग़ज़ा से इसराइल पर होने वाले रॉकेट हमले रोकना चाहता है. हमास और इसराइल दोनों ने संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है जिसमें तुरंत संघर्षविराम लागू करने की माँग की गई है. इसराइली विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि हमास किसी संघर्षविराम समझौते का सम्मान करेगा. इसराइली अभियान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी आलोचना हुई है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं. |
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