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रविवार, 19 अक्तूबर, 2008 को 11:24 GMT तक के समाचार
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डेमोक्रेटिक पार्टी का इतिहास
कैनेडी
कैनेडी अमरीका के सबसे युवा राष्ट्रपति थे
अमरीका में डेमोक्रेटिक पार्टी का उदय 1790 के दशक में थॉमस जेफ़रसन के नेतृत्व में हुआ था. उस समय कृषि हितों की रक्षा और केंद्र सरकार के हाथों में सारी शक्तियाँ होने के मुद्दे को लेकर काफ़ी गहमागहमी थी.

पार्टी की विचारधारा का मुख्य बिंदु था राज्यों के अधिकारों में उसका विश्वास यानी वो चाहती थी कि केंद्र सरकार कम से कम राज्य सरकार के काम में दख़ल दे और ज़िम्मेदारियाँ राज्य सरकारों पर छोड़ दे.

इसके साथ ग़ुलाम प्रथा का मुद्दा भी जुड़ गया जिससे पार्टी में उत्तरी और दक्षिणी डेमोक्रेटिक सदस्य बट गए. आख़िरकर 1860 में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार इब्राहम लिंकन जब अमरीकी राष्ट्रपति बने तो दक्षिण के डेमोक्रेटिक सदस्य संघीय ढाँचे से अलग हो गए और अमरीका गृह युद्ध की चपेट में आ गया.

पार्टी में मतभेद

कुछ प्रमुख डेमोक्रेटिक उम्मीदवार
एंड्रूय जैक्सन (1829-1837)
फ़्रैंकलिन रूज़वेल्ट (1933-1945)
हैरी एस ट्रूमैन ( 1945-1953)
जॉन कैनेडी ( 1961-1963)
जिमी कार्टर ( 1977-1981)
बिल क्लिंटन ( 1993-2001)

युद्ध के बाद के वर्षों के दौरान पार्टी पर वफ़ादार नहीं होने के आरोप लगते रहे और उसे 1884 तक सत्ता से बाहर रहना पड़ा. अल्पमत पार्टी के तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी को दक्षिण के लोगों और उत्तर में अल्पसंख्यक जनजातीय लोगों का समर्थन था.

पार्टी का नाम धीरे-धीरे समाज के ऐसे लोगों के साथ जुड़ने लगा जो हाशिए पर हैं जैसे ग़रीब किसान या जिन्हें तरक्की का फ़ायदा नहीं मिला.

लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहने के कारण पार्टी को काफ़ी नुकसान हुआ और सदस्य बट गए. 1924 में हुई कन्वेंशन में 103 अलग-अलग बैलेट के बाद वो राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुन पाए. बाद में रिपब्लिकन पार्टी की विफलता और ग्रेट डिप्रेशन के बाद पैदा हुई स्थितियों से नया राजनीतिक परिदृश्य बना और फ़्रेंकलिन रूज़वेल्ट राष्टपति बने.

रूज़वेल्ट पार्टी को सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर नई राह पे ले गए और पार्टी के दायरे में शहरी लोग, यूनियन, बुद्विजीवि, किसान, अल्पसंख्यक और दक्षिण में रहने वाले ग़रीब श्वेत लोग भी आ गए. 1932 से लेकर 1968 तक 36 में से 28 वर्षों तक राष्ट्रपति पद डेमोक्रेटिक पार्टी के पास रहा. सिर्फ़ आईज़नहॉवर इस बीच दो बार रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति बने (1952-1960).

सत्ता से बाहर

चर्चिल और स्टालिन के साथ रूसवेल्ट

साठ के दशक में गठबंधन टूटने लगा. वियतनाम युद्ध और यूनियन के बढ़ते क़दमों ने डेमोक्रेटिक पार्टी में और फूट डाल दी. पार्टी को केवल एक वर्ग से जोड़ कर देखा जाने लगा.

1968 से लेकर 1992 तक डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार केवल चार सालों के लिए व्हाइट हाउस में रहा. केवल जिमी कार्टर और बिल क्लिंटन इस रूख़ को मोड़ पाए. राष्ट्रपति निक्सन को लेकर हुए वाटरगेट घोटाले के बाद जिमी कार्टर आए थे.

लेकिन उनका प्रदर्शन काफ़ी ख़राब रहा और उनके जाने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी 12 वर्षों तक सत्ता में नहीं आ सकी. 1993 में फिर बिल क्लिंटन सत्ता में आए.

क्लिंटन का कार्यकाल

डेमोक्रेटिक पार्टी का लोगो

क्लिंटन की सबसे बड़ी उपबल्धि ये मानी जाती है कि उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी को फिर से उस दल के तौर पर स्थापित किया जो अच्छे आर्थिक प्रबंधन में विश्वास रखती है. रूज़वेल्ट के बाद दोबारा चुने जाने वाले वे पहले डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति बने. इस दौरान अमरीकी अर्थव्यवस्था का ख़ूब विस्तार हुआ.

लेकिन दूसरे कार्यकाल में व्हाइट हाउस की कर्मचारी मोनिका लेविंस्की के साथ संबंध और शपथ के तहत इस बात से इनकार करने को लेकर महाभियोग का मुद्दा छाया रहा. हालांकि सिनेट में वे दोषमुक्त साबित हुए.

वर्ष 2000 के चुनाव में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार अल गोर ने क्लिंटन के तहत हुई आर्थिक तरक्की का मुद्दा जो़र शोर से उठाया लेकिन वे रिपब्लिकन पार्टी के जॉर्ज बुश से हार गए. 2004 में भी पार्टी को सफलता नहीं मिली. जॉन केरी चुनाव हार गए हालांकि वे काफ़ी कम अंतर से हारे थे.

डेमोक्रेटिक पार्टी की किस्मत 2006 से बदलनी शुरु हुई. इराक़ से आने वाली नकारात्मक ख़बरों ने रिपब्लिकन पार्टी की साख़ पर असर डाला. 1994 के बाद पहली बार मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने जीत हासिल की और कांग्रेस के दोनों सदनों पर क़ब्ज़ा जमाया. 2008 में पार्टी को उम्मीद है कि इराक़ युद्ध को लेकर असंतोष का फ़ायदा उसे मिलेगा.

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