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अमरीकी नैया का भारतीय खेवनहार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बुश प्रशासन ने अपनी डांवाडोल हो रही अर्थव्यवस्था को पार लगाने के लिए जिस सात सौ अरब डॉलर की मुहिम तैयार की है, उसकी बागडोर भारतीय मूल के नील कशकरी के हाथों में सौंपी गई है. हालांकि उनका जन्म अमरीका में हुआ लेकिन उनके पिता चमन कशकरी भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर से हैं. वो एक अमरीकी विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग के प्रोफ़ेसर थे और अब रिटायर हो गए हैं और माँ शीला कशकरी पैथोलोजिस्ट हैं. केवल पैंतीस साल के नील कशकरी जानेमाने निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स में काम कर चुके हैं और पिछले दो वर्षो से अमरीकी वित्त मंत्रालय में सहायक सचिव के पद पर काम कर रहे थे. जब वित्त मंत्रालय में उनकी नियुक्ति हो रही थी उस समय कांग्रेस के सवाल जवाब के दौरान उन्होंने कहा था कि वो भारत के वित्तीय क्षेत्र के उदारीकरण और मुक्त व्यापार से जुड़ी नीतियों पर भी काम कर चुके हैं. अहम ज़िम्मेदारी वित्त मंत्रालय की तरफ़ से जारी एक बयान में कहा गया है कि नील कशकरी ऑफ़िस ऑफ़ फ़ाइनेंसियल स्टेबिलिटी और ट्रॉब्ल्ड ऐसेट्स रिलीफ़ प्रोग्राम के प्रमुख होंगे. वाल स्ट्रीट जरनल ने नील कशकरी का परिचय एक ऐसा व्यक्ति कहकर करवाया है जिसकी जेब में आज सात सौ अरब डॉलर हैं. ग़ौरतलब है कि वित्त मंत्री हेनरी पॉलसन गोल्डमैन सैक्स के सीइओ थे जब उन्होंने मई, 2006 में वित्त मंत्रालय संभाला था और उसी महीने कशकरी भी गोल्डमैन सैक्स छोड़कर वित्त मंत्रालय में आए थे. कुछ लोग मज़ाक में ये भी कहते हैं कि दोनों में एक और समानता ये है कि दोनों ही के बाल नहीं हैं या फिर दोनों ही हमेशा सर मुड़वा कर रखते हैं. कुछ लोग इतने कम उम्र के कशकरी के हाथों में इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी पर सवाल भी कर रहे हैं और वाल स्ट्रीट जरनल का ये भी कहना है कि पॉलसन अपने इर्द गिर्द गोल्डमैन सैक्स के लोगों को ही रखना पसंद करते है. ओहायो में पले बढ़े कशकरी ने इलिनोय विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की हुई है और पेंसिलवैनिया के व्हार्टन स्कूल से उन्होंने एमबीए कर रखा है. और गोल्डमैन सैक्स में काम करने से पहले वो नासा में भी स्पेस अभियान के लिए तकनीक विकसित कर चुके हैं. लेकिन इस बार उनके कंधों पर जो ज़िम्मेदारी है उस पर केवल अमरीका की ही नज़र नहीं होगी, बल्कि पूरी दुनिया की नज़र होगी क्योंकि अमरीका की डांवाडोल आर्थिक नैया को देखकर दुनिया के बाज़ार भी डूब उतरा रहे हैं. |
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