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काउब्वाय के देश में... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आपने शोले फ़िल्म तो देखी होगी, यदि नहीं देखी हो तो फिर घोड़े पर सवार, कमर में दो-दो पिस्तौल टांगे हुए काउब्वाय और वाइल्ड वेस्ट पर बनी तमाम अंग्रेज़ी फ़िल्मों में से कोई तो देखी होगी. बीबीसी की एलेक्शन बस पर सवार जब मैं एरिज़ोना के रेगिस्तानी इलाकों से गुज़रा तो नज़र आ रहे थे आदमकद कैक्टस के झाड़, पथरीले पहाड़ और उसी के बीच बसा हुआ नज़र आया छोटा सा शहर टोंबस्टोन और अचानक लगा जैसे मैं इन्हीं फ़िल्मों के जीते जागते सेट्स पर पहुंच गया हूं. लोग बड़ी बड़ी हैट, चुस्त पैंट, घुटनों तक के जूते, चौड़ी बेल्ट पहन के घूम रहे थे. बंदूकों की वहां कई दुकानें हैं. केवल अपना अमरीकी ड्राइविंग लाइसेंस दिखा कर आप बंदूक ख़रीद सकते हैं. यहां के कलाकार बाहर से आए लोगों को शहर के उस इतिहास से वाकिफ़ कराते हैं जो 125 वर्ष पुराना है और जीके कोरल गन फ़ाइट के नाम से तारीख़ में दर्ज है. कहते हैं कि वर्ष 1881 की ये लड़ाई भी रिपब्लिकन पैसे वालों और डेमोक्रेट काउब्वाय गैंग्स के बीच शहर पर राजनीतिक प्रभुत्व के लिए थी. उन दिनों हफ़्ते में कम से कम 20 लोग गोलियों का शिकार बनते थे. वक्त बदल गया है लेकिन अमरीका के वाइल्ड वेस्ट कहे जानेवाले इन इलाक़े में बंदूक से मोहब्बत कम नहीं हुई है. जिम न्यूबैरो बंदूक की दुकान चलाते हैं और पिछले 10 महीनों में 100 बंदूके बेच चुके हैं. दो सौ डॉलर से 1600 डॉलर तक की बंदूकें हैं उनकी दुकान में. शहर की आबादी है मुश्किल से 15 सौ. मैंने पूछा कि इस चुनाव में आपके लिए सबसे बड़ा मुद्दा क्या है. जवाब था, ''बंदूकें''. कहते हैं कि बंदूक रखने का हक़ हमें इस देश का क़ानून बनाने वालों ने दिया है और हम चाहेंगे कि वो बरकरार रहे. तो कौन उम्मीदवार है जिस पर उन्हें यकीन है. वे कहते हैं-जॉन मैक्केन. 'संस्कृति का हिस्सा' इस शहर में बंदूकों की आवाज़ खामोश नहीं करवाई जा सकती ये तो उनसे बात करके अंदाज़ा हो जाता है और इसका फ़ायदा जॉन मैक्केन को ही होगा इसमें शायद किसी को शक नहीं.
क्योंकि केवल पुरुष ही नहीं इस पूरे एरिज़ोना में महिलाएँ भी बंदूकों से उतना ही लगाव रखती हैं. फ़ीनिक्स में रहनेवाली कैरॉल रू अक्सर काम से लौटकर शाम में टारगेट शूटिंग के लिए पहुँच जाती हैं. आख़िर क्यों है मोहब्बत इस जानलेवा चीज़ से? वे कहती हैं कि ये हमेशा से रहा है. पहले लोग ज़िंदा रहने के लिए इसे रखते थे, अब ये अमरीकी संस्कृति का हिस्सा बन चुका है. लेकिन क्या इस तरह से इसका वज़न, इसकी अहमियत कम नहीं हो जाती, लोग इसे खिलौने की तरह नहीं देखने लगते. वे फ़ौरन जवाब देती हैं, " समंदर के पास बार बार जाने से उसका कद कभी आप कम आंकते हैं." ये वो अमरीका है जहाँ परिवार, चर्च, देश, फ़ौज बहुत ज़्यादा मायने रखते हैं और बंदूक कुछ हद तक उसी सोच का, उसी ज़िंदगी का हिस्सा है. और यही वो तबका है जिसे जॉन मैक्केन ने सारा पेलिन को उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाकर जोश से भर दिया है. क्योंकि सारा पेलिन घर भी चलाती हैं, दफ़्तर भी जाती हैं, चर्च भी जाती हैं, बंदूक भी चलाती है. ऐसे में बराक ओबामा बंदूक के हक़ में बात करें या उसके ख़िलाफ़, ऐसी तस्वीरें उनके टिकट पर नहीं नज़र आ सकती. (ब्रजेश उपाध्याय बीबीसी की उस विशेष बस पर सवार है जो अमरीका के मतदाताओं का रुख़ भांपने के लिए विभिन्न प्रांतों से गुजर रही है) |
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