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समुद्रतल में ज्वालामुखी की खोज | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों ने समुद्र की अतल गहराइयों में हज़ारों साल से निष्क्रिय पड़े हुए विशाल ज्वालामुखी पर्वतों के अध्ययन का दिलचस्प प्रयोग शुरू किया है. समुद्र की सतह से छह किलोमीटर गहराई में मौजूद दुनिया के इन सबसे गर्म ज्वालामुखी पर्वतों के आसपास मौजूद गैसों, मिट्टी और वहाँ रहने वाले जीव जंतुओं का अध्ययन किया जाएगा. ब्रिटिश वैज्ञानिकों का एक अध्ययन दल इस अभियान का नेतृत्व कर रहा है. दिलचस्प बात ये है कि इस काम के लिए एक पनडुब्बी का इस्तेमाल किया जाएगा. इस पनडुब्बी को रिमोट कंट्रोल से नियंत्रित किया जाएगा. ब्रिटेन में साउथएम्प्टन के राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान केंद्र के डॉक्टर जॉन कॉपली इस अभियान के प्रमुख हैं. उन्होंने कहा, "हम एक एक महीने के लिए दो अभियान शुरू करने जा रहे हैं. इस दौरान ज्वालामुखी की पूरे विस्तार का अध्ययन किया जाएगा." अनसुलझे रहस्य उनका कहना है कि कैरिबियन के पास समुद्रतल में ये ज्वालामुखी पर्वत की सबसे लंबी श्रंखला है और अभी तक इसका अध्ययन नहीं किया गया है. जिस पनडुब्बी को समुद्र में उतारा जाएगा उसे ऑटोसब 6000 नाम दिया गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रक्रिया से पता चलेगा कि इन ज्वालामुखी पर्वतों के आसपास जल-जीवन कैसा है. डॉक्टर कोपली ने बीबीसी को बताया कि कुछ जगहों पर धरती की भीतरी सहत सीधे समुद्र से लगती है इसलिए वहाँ का तापमान काफ़ी ज़्यादा है. डॉक्टर कोपली ने कहा, "वहाँ का तापमान 500 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है. इसलिए वहाँ अलग तरह की रासायिनिक प्रक्रियाएँ होती होंगी जिसके नतीजे में नए तरह के जंतु भी वहाँ मिल सकते हैं." | इससे जुड़ी ख़बरें माउंट मेरापी ज्वालामुखी फिर सक्रिय08 जून, 2006 | पहला पन्ना ज्वालामुखी को लेकर चिंता बरकरार14 मई, 2006 | पहला पन्ना ज्वालामुखी में लोगों की आस्था?13 मई, 2006 | पहला पन्ना अल सल्वाडोर में ज्वालामुखी फटा, दो मरे02 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना सबसे ऊँचा ज्वालामुखी कौन सा है?03 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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