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ज़िम्बाब्वे:'चुनावी धांधली' पर गुप्त फ़िल्म

ज़िम्बाब्वे
मुगाबे को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई जा चुकी है
ज़िम्बाब्वे में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान धांधली के नए सुबूत सामने आए हैं. वहाँ के एक जेल गार्ड शेपर्ड युदा ने गुप्त फ़िल्म बनाई है जिसमें जेल में चुनावी धांधली को दर्शाया गया है.

शेपर्ड युदा समेत कई जेल अधिकारियों को वरिष्ठ अधिकारियों ने मजबूर किया था कि वे रॉबर्ट मुगाबे के लिए वोट डालें. शेपर्ड को ज़िम्बाब्वे से भागना पड़ा है.

जब ये लोग मतदान कर रहे थे तो अधिकारी उनके सर पर खड़े रहे.

शेपर्ड युदा ने फ़िल्म बनाने का फ़ैसला तब किया जब उनके रिश्तेदार को दो महीने पहले मार दिया गया. वे विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ता थे.

फ़िल्म के बारे में वे कहते हैं, "मैने कभी ऐसी हिंसा नहीं देखी. कई बच्चे यतीम हो गए हैं. आप सरकार से ऐसी उम्मीद तो नहीं करते."

गुप्त फ़िल्म

शेपर्ड युदा ने गुप्त रूप से फ़िल्माया है कि कैसे मतदान के दौरान निरीक्षक शमबीरा वहीं खड़े रहे देखते रहे और अधिकारियों ने वोट डाला.

निरीक्षक ने सुनिश्चित किया कि वे लोग विपक्षी नेता चांगिरई को नहीं रॉबर्ट मुगाबे को वोट डालें. इसके बाद हर वोट को परिचय नंबर के साथ मिलाया गया यानी कुछ मतदान गुप्त नहीं था.

शेपर्ड युदा का कहना था कि उनके पास मुगाबे को वोट देने के अलावा और कोई चारा नहीं था.

एक मतदाता ने शोपर्ड को बताया, "जब आप वोट डालते हैं तो वे आपके सामने खड़े रहते हैं. शमबीरा देखते रहते हैं, आप कुछ भी छिपा नहीं सकते. मैं सोच रहा था कि जब वो न देख रहा तो मैं मतदान करुँ लेकिन वो गिद्ध की तरह देख रहा था."

फ़िल्म में क़ैदी तेंदई बिटी की बेड़ियाँ खोलते हुए दिखाया गया है जो सासंद और मानवाधिकार वकील हैं.

शेपर्ड युदा बताते हैं, मुझे बहुत ख़राब लगा. तेंदई बिटी के कद के नेता के साथ ऐसा बर्ताव. ये बहुत दुखद है.

शेपर्ड ने जेल गार्ड की आपसी बातचीत भी रिकॉर्ड की है. एक गार्ड उन्हें बताता है, "मेरे इलाक़े में बहुत तनाव है.जैसे ही मैं काम पर आया सत्ताधारी पार्टी ज़ानू-पीएफ़ के लोग मेरे घर आए. मेरी पत्नी को बंधक बना लिया और अड्डे पर ले गए."

हरारे में कई घरों को अड्डे के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.

एक अन्य जेल गार्ड ने बताया, "मुझे ज़बरदस्ती इन अड्डों पर जाना पड़ता है ड्यूटी के लिए. पूरी गली की ही नाकेबंदी कर दी जाती है. कोई वहाँ नहीं जा सकता. ये लोग हत्यारों की तरह हैं, जिन्हें ज़ानू-पीएफ़ इस्तेमाल कर रही है."

जबकि एक गार्ड फ़िल्म में बोल रहा है कि अंतरराष्ट्रीय जगत को ज़िम्बाब्वे के लिए और क़दम उठाने चाहिए.

चुनाव के दिन शेपर्ड ने एक ऐसी महिला की फ़िल्म बनाई हैं जो इतनी डरी हुई है कि वो वोट डालने का नाटक कर रही है. उसने अपनी उंगली पर ग़ुलाबी रंग चढ़ाया ताकि सबको ये लगे कि वो वोट डाल चुकी है.

चुनाव के एक दिन बाद शेपर्ड और उनके परिवार ने ज़िम्बाब्वे छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था.

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