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'ज़िम्बाब्वे में निष्पक्ष चुनाव असंभव' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से पारित एक प्रस्ताव में कहा है कि ज़िम्बाब्वे में स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीक़े से राष्ट्रपति पद के चुनाव कराना असंभव है. सुरक्षा परिषद ने ज़िम्बाब्वे में हिंसा और विपक्ष को धमकियाँ दिए जाने की कड़ी निंदा की है. इस बीच मूवमेंट फॉर डेमोक्रेटिक चेंज (एमडीसी) के नेता मार्गन चांगिराई ने हरारे में डच दूतावास में शरण ली है. ज़िम्बाब्वे की सरकार से अपील की गई है कि वह विपक्ष को धमाकाना बंद करे और हिरासत में लिए गए विपक्षी नेताओं का रिहा करे. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने भी कहा है कि 'ज़िम्बाब्वे में राष्ट्रपति चुनाव टाल दिए जाने चाहिए' क्योंकि वहाँ की विपक्षी पार्टी चुनावी प्रक्रिया से अलग हो गई है. दक्षिण अफ़्रीका, चीन, रूस भी एकजुट एक बयान में सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्यों ने कहा है कि वहाँ के राष्ट्रपति चुनाव जिनके लिए शुक्रवार को मतदान होना है, स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीक़े से नहीं हो सकते. लेकिन संयुक्त राष्ट्र में ज़िम्बाब्वे के प्रतिनिधि ने कहा है कि चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक ही होंगे. न्यूयॉर्क में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि दक्षिण अफ़्रीका, रूस और चीन ने भी ज़िम्बाब्वे की कड़ी आलोचना की है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बयान में कहा गया है - "सुरक्षा परिषद राजनीतिक विपक्ष के ख़िलाफ़ हिंसक अभियान की निंदा करती है. इससे अनेक विपक्षी कार्यकर्ताओं और ज़िम्बाब्वे के अन्य नागरिकों की मौत हुई है. अनेक लोगों को पीटा गया है और महिलाओं और बच्चों सहित हज़ारों इसी कारण से विस्थापित हुए हैं." संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी दूत ज़लमेय ख़लीलज़ाद का का कहना है कि सुरक्षा परिषद ने ज़िम्बाब्वे राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे को एक कड़ा संदेश भेजा है. अफ़्रीकी देशों का रुख़ कई अफ़्रीकी देशों के नेताओं से बातचीत के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा कि ज़िम्बाब्वे की सरकार को बहुत साफ़ शब्दों बताना चाहिए कि वह चुनाव टाल दे. बान की मून ने ज़िम्बाब्वे के मामले को क्षेत्रीय स्थिरता का मसला बताते हुए कहा है कि इसके परिणाम ज़िम्बाब्वे की सीमा से बाहर होंगे. ज़िम्बाब्वे के पड़ोसी देश दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति थाबो एम्बेकी इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाते रहे हैं लेकिन उन्होंने रॉबर्ट मुगाबे की आलोचना नहीं की है. ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति लेवी वानावासा ने अब तक सबसे सख़्त बयान दिया है और उन्होंने ज़िम्बाब्वे के घटनाक्रम को शर्मनाक बताया है. नामीबिया, बोत्सवाना, अंगोला जैसे सभी देशों ने हिंसा की आलोचना तो की है लेकिन चुनाव के बारे में कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है. मोज़ाम्बिक ने ज़िम्बाब्वे से निकाले गए कुछ गोरे किसानों को पनाह दी है और माना जाता है कि वह विपक्षी आंदोलन से सहानुभूति रखता है. तंज़ानिया और कांगो परंपरागत रुप से मुगाबे के समर्थक रहे हैं जबकि मलावी ने निष्पक्ष रवैया अख़्तियार कर रखा है. | इससे जुड़ी ख़बरें दूसरे दौर के चुनाव से हटे चांगिरई22 जून, 2008 | पहला पन्ना मुगाबे ने हिंसा के आरोप झूठे बताए21 जून, 2008 | पहला पन्ना चांगिराई दो महीने बाद ज़िम्बाब्वे लौटे24 मई, 2008 | पहला पन्ना राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों की घोषणा02 मई, 2008 | पहला पन्ना चांगिराई की स्पष्ट जीत-अमरीका24 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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