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चीन-ताइवान संबंधों की नई 'उड़ान' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन और ताइवान के बीच पिछले साठ वर्षों में पहली बार सीधी विमान सेवा शुरु हो गई है. इसे दोनों देशों के रिश्तों में आए सुधार का संकेत माना जा रहा है. वर्ष 1949 में गृह युद्ध के बाद ताइवान चीन से अलग हो गया था और आपसी संपर्क भी सीमित हो गए. अब तक यात्रियों को चीन से ताइवान या ताइवान से चीन जाने के लिए किसी तीसरे देश का सहारा लेना पड़ता था. लेकिन चीन के गुआंगशाउ शहर से ताइपेई हवाई अड्डे पर विमान के लैंड के करते ही ये समस्या दूर हो गई. अब दोनों देशों के कई शहरों के बीच नन स्टॉप उड़ान सेवा शुरु हो गई है. हालाँकि अभी यह सप्ताहांत तक ही सीमित होगी लेकिन इसे दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने की दिशा में बड़ा क़दम माना जा रहा है. ताइवान में मा येंग जियो के राष्ट्रपति बनने के बाद चीन-ताइवान के परस्पर संबंधों में गर्माहट आई है. चीन का मानता रहा है कि ताइवान उसका हिस्सा है और वह कई बार उसे मुख्य चीन में मिलाने के लिए बल प्रयोग की धमकी दे चुका है. उड़ान इस हफ़्ते के अंत तक दोनों देशों के बीच 36 उड़ानें शुरु हो जाएंगी. ताइपेई पहुँचे पहले विमान में 250 यात्री सवार थे. इसमें चीन के एक सौ पर्यटक शामिल हैं. ताइपेई पहुँचने पर इनका पारंपरिक ढंग से स्वागत किया गया. जब चीन के सदर्न एयरलाइन का विमान ताइवान पहुँच रहा था, उसी समय ताइवान से पर्यटकों को लेकर एक विमान शंघाई की ओर बढ़ रहा था. दोनों देशों के बीच यात्रियों की संख्या तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है. चीन ने 18 जुलाई से हर दिन तीन हज़ार पर्यटकों को ताइवान जाने की अनुमति देने का फ़ैसला किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें चीन-ताइवान के बीच ऐतिहासिक बैठक12 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना ताइवान में मा यिंग-जेओ चुनाव जीते22 मार्च, 2008 | पहला पन्ना ताइवान में नेशनलिस्ट पार्टी की जीत12 जनवरी, 2008 | पहला पन्ना ताइवान के पास ज़बरदस्त भूकंप26 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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