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एक भारत कीनिया में भी... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कीनिया से पारिवारिक संबंधो की वजह से नैरोबी में बराक ओबामा की धूम है. जब हम टैक्सी में जा रहे थे तो एक एफ़एम रेडियो स्टेशन पर बराक ओबामा की तारीफ़ों के पुल बांधता एक गीत चल रहा था. नैरोबी में आपको कई जगह ओबामा की तस्वीरें लगी मिल जाएँगी, और हों भी क्यों नहीं, आख़िर उन्हें अमरीका में राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार जो चुन लिया गया है. कीनिया के लोग खुल कर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं. कुछ-कुछ भारतीयों की तरह. लेकिन लोगों में समानताओं से आगे की बात की जाए तो कीनिया की राजधानी नैरोबी किसी मिनी इंडिया की तरह ही है. यहां की सड़कें, ट्रैफ़िक जाम आपको भारत की याद दिलाते हैं. हमारे ड्राइवर स्टैनली ने बताया कि कीनिया की सड़कें इतनी ख़राब हैं कि यहां टाटा और महिंद्रा की गाड़ियाँ नहीं चल पाईं. हर लाल बत्ती पर लोग सामान बेचते दिख जाएंगे. रोड के किनारे छोटी-छोटी दुकानों में भी छोटा-मोटा सामान मिल जाएगा. हालांकि भारत की तुलना में यहां सड़कों पर कम लोग दिखाई पड़ते हैं. यहां चारों तरफ़ हरियाली है. साफ़ सफ़ाई का पूरा ध्यान रखा जाता है और यहाँ का मौसम इतना अच्छा है कि लोग तारीफ़ करते नहीं थकते. जब मैं यह लेख लिख रहा हूँ और खिड़की के बाहर झांकता हूँ तो आसमान में बादल नज़र आते हैं और हल्की सी धूप खिली हुई है. बेहद सुहावना मौसम है. हर क्षेत्र में भारतीय नैरोबी में शाम छह बजे के बाद थोड़ी सावधानी बरतने की ज़रूरत है. हमें सलाह दी गई कि हम बिना गाड़ी के बाहर नहीं निकलें. सुरक्षा कंपनियों का काम ज़ोरों पर है. ज़्यादातर सोसाइटी या घरों के बाहर आपको सुरक्षा गार्ड मिलेगा और साथ ही दिखाई देंगे सुरक्षा मुहैया करवाने वाली कंपनियों के नाम. कीनिया में रहने वाले करीब 90,000 भारतीयों ने इस देश को ऐसे अपनाया है कि पूछिए मत. ये देश एक जन्नत है, ऐसा कहते आपको अनेक भारतीय मूल के लोग मिल जाएंगे जो यहाँ की स्थानीय भाषा स्वाहिली फ़र्राटे से बोलते हैं. उन्होंने बताया कि स्वाहिली जैसी आसान भाषा कोई नहीं है और इसको सीखने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगता. अपनी बात करूं तो मैं तीन दिनों में ज़्यादा कुछ नहीं पकड़ पाया हूँ. जो भारतीय यहाँ आए, बस यहीं के होकर रह गए. चाहे वो कुछ साल पहले आने वाले भारतीय हों, या फिर 19वीं शताब्दी में यहां आने वाले भारतीय जिन्हें अंग्रेज़ बड़ी संख्या में रेल की पटरी बिछाने के लिए कीनिया लाए थे. लेकिन उस समय और आज के समय में बहुत अंतर है. इतनी कम संख्या में होने के बावजूद कीनिया के हर क्षेत्र में भारतीय मूल के लोग छाए हुए हैं. नैरोबी हवाई अड्डे पर उतरते ही मुझे अक्षय कुमार की फ़िल्म 'भूल भुलैयाँ' का गाना सुनाई दिया. मुड़ कर देखा तो एक व्यक्ति का मोबाइल बज रहा था. कीनिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों की एक बड़ी संख्या व्यापार से जुड़ी हुई है और ये व्यापारी आलीशान कोठियों में रहते हैं. नैरोबी का डायमंड प्लाज़ा भारतीयों का ऐसा ही एक मनपसंद शॉपिंग केंद्र है. यहाँ हमारा साथ दिया कपिला ढींगरा ने जिनका परिवार कीनिया में कई स्कूल चलाता है. पान की दुकान
यहाँ पान की दुकान से लेकर फ़ैशन तक का सामान मिलता है और हमेशा लोगों का तांता लगा रहता है. कपिला ने हमें बताया कि यहां की पान की दुकान में फ़िल्मों से लेकर राजनीति की ज़ोरों से चर्चा होती है और बहस ऐसी होती है कि क्या कहने. यहां मौजूद है भारतीय संगीत बेचने वाली एक मशहूर दुकान अल्काश. इस दुकान को चलाने वाली प्रीति ने हमें गर्व से बताया कि उनकी दुकान में कई फ़िल्मी सितारे आ चुके हैं और फ़िल्म रेस का संगीत आजकल अव्वल है. डायमंड प्लाज़ा में यहाँ एक कोने में अल हातिम्स कॉर्नर में एक दुकान में पान के साथ कई चीज़ें मिलती हैं. पास की ही एक और दुकान में एक काला व्यक्ति गन्ने का रस बेचता दिखा. छप्पन भोग नाम की एक दुकान में बंगाली मिठाइयाँ की बिक्री सबसे ज़्यादा है. अल्काश के नज़दीक है भारतीय खाने की एक मशहूर दुकान चौपाटी जहां जैन लोगों के लिए बिना प्याज़ वाला खाना मिलता है. डायमंड प्लाज़ा से कुछ दूरी पर है सरित सेंटर जहां भारतीय मूल के लोग अपनी ज़रूरत की चीजें खरीदने आते हैं. यहीं पर मेरी मुलाकात हुई स्वर्ण वर्मा से जो अपनी पत्नी के साथ फ़िल्म सरकार राज देखने आए थे. उनकी पत्नी को उम्मीद थी कि फ़िल्म अच्छी होनी चाहिए क्योंकि फ़िल्म में बच्चन परिवार है. कीनिया में भारतियों ने अपनी आस्था को संभालकर रखा है. नैरोबी, मोंबासा और कुसूमू में आपको कई धार्मिक स्थान मिल जाएँगे. इन्हीं में से एक है नैरोबी स्थित सनातन धर्म सभा जहाँ हर रविवार बड़ी संख्या में भारतीय इकठ्ठा होते हैं. यहां हर देवी देवता की मूर्ति है. साथ में है बालाजी की मंदिर जिसमें लोगों की बड़ी आस्था है. कीनिया में भारतीय मूल के लोग मिल जुल कर रहते हैं. लेकिन उनके कुछ ज्वलंत मुद्दे भी हैं. पिछले वर्ष दिसंबर में चुनावी हिंसा में कई भारतीय व्यापारियों को भारी नुकसान पहुंचा. उनके सामने कई सवाल खड़े हैं. वे कितने कीनियाई हैं और कितने भारतीय. उनका कहना है कि भारत सरकार को प्रवासी भारतीय दिवस जैसे सरकारी कार्यक्रमों से आगे बढ़कर सोचना पड़ेगा और अफ़्रीका में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी पड़ेगी क्योंकि भारत सरकार क्या करती है उसका सीधा असर यहां रहने वाले भारतीयों के भविष्य से जुड़ा है. | इससे जुड़ी ख़बरें जुनूनी और जज़्बाती लोगों का नाइजीरिया09 जून, 2008 | पहला पन्ना कीनिया में सांसद की हत्या के बाद हिंसा29 जनवरी, 2008 | पहला पन्ना कीनिया संकट: बातचीत में 'सफलता'08 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना कीनिया सरकार और विपक्ष में सहमति28 फ़रवरी, 2008 | पहला पन्ना इतिहास रचते बराक ओबामा 04 जून, 2008 | पहला पन्ना 'कीनिया में गंभीर मानवीय संकट'05 जनवरी, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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