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हर तरह से ऐतिहासिक दिन था वह | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लगभग पचास साल पहले जब एक काली अमरीकी महिला रोज़ा पार्क्स ने या फिर उसके कुछ ही सालों के बाद गांधी के रास्ते पर चलनेवाले मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अमरीका में काले लोगों के समान अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद की थी तो शायद उन्हें भी एहसास नहीं रहा होगा कि अमरीका कभी ये दिन देखेगा. मंगलवार को जो हुआ उसके लिए शायद ऐतिहासिक शब्द को कितनी बार ही दोहराया जाए वो कम पड़ेगा. ज़रा सोच कर देखिए जिस देश में सालों पहले काले लोग ग़ुलाम बना कर लाए गए थे, सालों तक जिन्हें दबा कर कुचल कर रखा गया उसी अमरीका के सैंकड़ों सालों के इतिहास में पहली बार किसी अफ़्रीकी अमरीकी ने राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर क़ब्ज़ा किया है. और जब बराक हुसैन ओबामा ने मंगल की रात अपनी जीत का ऐलान किया तो उनका भी यही कहना था कि आज की रात एक ऐतिहासिक सफ़र का अंत हो रहा है दूसरा शुरू हो रहा है. किसी को उम्मीद नहीं थी सोलह महीने पहले जब ओबामा ने अपना अभियान शुरू किया था तो शायद बहुत गिने चुने लोगों को ही यकीन रहा होगा कि जिसने अभी अमरीकी सेनेट में मुश्किल से दो साल पूरे किए हैं वो बराक ओबामा हिलैरी क्लिंटन के सामने खड़े हो पाएंगे. लेकिन आइवोआ से मोंटाना तक के इस प्राइमरी सफ़र में हार्वर्ड लॉ स्कूल के इस ग्रैजूएट ने मानो अमरीकी लोकतंत्र को अपने आप पर इतराने का एक मौका दिया. कहते हैं कि डेमोक्रैटिक पार्टी के इतिहास में ऐसे मैराथन मुक़ाबले तो नज़र आए हैं लेकिन ऐसी कांटे की टक्कर नहीं देखने को मिली है.
और ज़ाहिर है ऐसे मुक़ाबले में गोलपोस्ट तक पहले पहुंचनेवाला उम्मीदवार भी ख़ासा चोट खा चुका होता है, दूसरे ख़ेमे में भी ख़ासी कड़वाहट आ चुकी होती है जैसा कि हिलैरी क्लिंटन के समर्थकों में देखने को मिल रहा है. कई राज्यों में गोरे अमरीकी डेमोक्रेट वोटरों ने ओबामा से मुंह फेर रखा है. और ये भांपते हुए जीत के बाद ने ओबामा ने हिलैरी क्लिंटन की तारीफ़ में कोई कमी नहीं छोड़ी. उनका कहना था, " आज मैं एक बेहतर उम्मीदवार हूँ क्योंकि मुझे हिलैरी रॉडहैम क्लिंटन के साथ मुक़ाबला करने का सौभाग्य मिला." लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी की घर की कड़वाहट बाहर वालों से छिपी हो ऐसा नहीं है, और रिपबलिकन उम्मीदवार जॉन मैकेन ने भी कल हिलैरी की तारीफ़ में समां बांधा. इसलिए नहीं कि हिलैरी से उन्हें बहुत लगाव है बल्कि शायद इसलिए कि ओबामा से नाराज़ हिलैरी के समर्थक कहीं उनकी झोली में आ गिरें. और इन सबके बीच हिलैरी क्लिंटन ने एक मंजे हुए राजनीतिज्ञ की तरह न तो अभी हार कूबूल किया है ने अपना पत्ता खोलने को तैयार हुई हैं. हिलैरी चाहें तो इस मुक़ाबले को डेनवर तक खींच सकती हैं क्योंकि औपचारिक तौर पर वहीं उम्मीदवार का एलान होता है और वहीं पार्टी के डेलिगेट्स अपना वोट डालते हैं. लेकिन इस पार्टी के अंदर की खाई और गहरी होगी और ये ओबामा को मंहगा पड़ सकता है. उन्हें जीतना है तो उन्हें हिलैरी के हर समर्थक के वोट की ज़रूरत होगी. और इसलिए ये चर्चा भी ज़ोरों पर है कि पार्टी को एक करने के लिए उन्हें हिलैरी क्लिंटन को उप राष्ट्रपति पद के टिकट का न्योता देना चाहिए. क्या यही वजह है कि हिलैरी ने अभी तक अपनी हार नहीं स्वीकार की है? क्या इतनी कड़वी लड़ाई के बाद ओबामा हिलैरी के साथ मिलकर काम करने की सोच सकते हैं? ये वो सवाल हैं जिनका जवाब डेमोक्रैटिक पार्टी को बहुत जल्द ढूंढना होगा अगर उन्हें नवंबर में व्हाइट हाउस पर क़ब्ज़ा करना है. | इससे जुड़ी ख़बरें डेमोक्रेटिक पार्टी की अहम बैठक31 मई, 2008 | पहला पन्ना 'ओबामा राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी जीत सकते हैं'03 जून, 2008 | पहला पन्ना इतिहास रचते बराक ओबामा 04 जून, 2008 | पहला पन्ना ओबामा को चाहिए उपराष्ट्रपति उम्मीदवार04 जून, 2008 | पहला पन्ना इसराइल की सुरक्षा अनिवार्य हैःओबामा 04 जून, 2008 | पहला पन्ना हिलेरी मैदान से हटने की तैयारी में05 जून, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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