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इराक में ऑस्ट्रेलियाई सेना की कार्यवाइयाँ बंद | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में पाँच वर्ष पहले सेना भेजने वाले देश ऑस्ट्रेलिया ने वहाँ अपनी कार्यवाइयों को बंद करने का फ़ैसला किया है. ऑस्ट्रेलिया उन देशों में था जिसने सबसे पहले इराक़ में सेना भेजने का फ़ैसला किया था. ऑस्ट्रेलियाई सेनिक कुछ ही दिनों में घर वापस आना शुरू कर देंगे. य़ाद रहे कि ऑस्टेलिया के नए प्रधानमंत्री केविन रड ने जनता से वादा किया था कि वो ऑस्ट्रेलियाई सेना को इराक से जल्द से जल्द वापस बुलाएँगे. केविन रड ने कहा था कि इराक़ में सेना भेजने से उनका देश आतंकवादियों के निशाने पर आ जाएगा. ऑस्ट्रेलिया ने करीब 33,000 सैनिकों को प्रशिक्षण देने के लिए 500 से ज़्यादा सैनिकों को इराक़ में तैनात किया था. करीब 300 आस्ट्रेलियाई अन्य दूसरे कार्यों के लिए अब भी तैनात रहेंगे. पिछले पाँच वर्षों में किसी भी ऑस्ट्रेलियाई सैनिक की लड़ाई में मृत्यु नहीं हुई है, हालाँकि कई सैनिक इराक़ में चल रही लड़ाई में घायल ज़रूर हुए हैं. 'फ़ैसला सही' उधर पूर्व प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड ने वर्ष 2003 में ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों को इराक़ भेजने के अपने फ़ैसले को सही बताया है. सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड समाचारपत्र को दिए एक साक्षात्कार में जॉन हॉवर्ड ने कहा कि मुझे पूरा यकीन था कि ये फ़ैसला बिल्कुल सही है. उन्होंने कहा कि पूरी लड़ाई पर हालांकि बहुत ज़्य़ादा ख़र्च आया है. रक्षा मंत्री जोएल फ़िट्ज़गिबॉं ने कहा है कि आस्ट्रेलियाई सेना का इराक़ी मिशन सफ़लताओं से भरा था. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को अपने सैनिकों के कारनामों पर फ़क्र है. | इससे जुड़ी ख़बरें इराक़: कुल 4000 अमरीकी सैनिक मरे24 मार्च, 2008 | पहला पन्ना इराक़ में हिंसा का दिन, 50 की मौत23 मार्च, 2008 | पहला पन्ना संघर्ष रुकते ही बग़दाद से कर्फ़्यू हटा31 मार्च, 2008 | पहला पन्ना सद्र ने मेहदी आर्मी को वापस बुलाया30 मार्च, 2008 | पहला पन्ना इराक़ में विस्फोटों में 70 की मौत15 अप्रैल, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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