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ज़िम्बाब्वे में चुनाव: मुगाबे को चुनौती | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ज़िम्बाब्वे में शनिवार को राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों के लिए मतदान हो रहा है. इन चुनावों से यह तय होना है कि क्या राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे छठीं बार इस पद पर बैठ सकेंगे. माना जा रहा है कि राष्ट्रपति मुगाबे के 28 सालों के शासनकाल के दौरान उनके लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है. 1980 में ज़िम्बाब्वे की आज़ादी के बाद से वे लगातार राष्ट्रपति रहे हैं. राष्ट्रपति मुगाबे को राष्ट्रपति पद के लिए विपक्षी उम्मीदवार मॉर्गन चांगिरई से चुनौती मिल रही है. इस समय ज़िम्बाब्वे अत्यंत बुरे आर्थिक संकट से गुज़र रहा है. इसका अंदाज़ा इस बात से भी हो सकता है कि वहाँ मंहगाई की दर एक लाख प्रतिशत से भी ज्यादा है. मगर 84 वर्षीय मुगाबे अभी सत्ता छोड़ने के मूड में नहीं लगते. वो ज़िम्बाब्वे के आर्थिक संकट के लिए भी ब्रिटेन और पश्चिमी देशों को ज़िम्मेदार मानते हैं. पश्चिमी देशों ने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं लेकिन इसका प्रभाव ज़्यादातर सत्तारूढ़ तबके पर ही माना जाता है. 1980 में ज़िबाब्वे को ब्रिटेन से आजादी मिली थी. मगर मुगाबे के प्रमुख प्रतिद्वंदी चांगिरई तीसरी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे हैं. दिक़्क़त यह है कि उनकी पार्टी 'मूवमेंट फॉर डेमोक्रेटिक चेंज' दो धड़ो में विभाजित है और इससे उनके वोट भी बँट सकते हैं. चुनावी हिंसा को ध्यान में ऱखते हुए ज़िम्बाब्वे में बड़ी संख्या में सेना की तैनात की गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें मुगाबे ही होंगे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार30 मार्च, 2007 | पहला पन्ना मॉर्गन चांगिरई सघन निगरानी में14 मार्च, 2007 | पहला पन्ना चांगिरई पर से देशद्रोह का मामला हटा02 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना राबर्ट मुगाबे की पार्टी को बहुमत02 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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