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बुधवार, 14 मार्च, 2007 को 11:43 GMT तक के समाचार
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मॉर्गन चांगिरई सघन निगरानी में
 मॉर्गन चैंगीराय
मॉर्गन चैंगीराय इस समय अस्पताल में भर्ती हैं
पुलिस हिरासत में घायल हुए ज़िम्बाब्वे के विपक्ष के नेता मॉर्गन चांगिरई का अस्पताल में उपचार चल रहा है. उन्हें सघन निगरानी में रखा गया है.

मॉर्गन चांगिरई के प्रवक्ता विलियम बैंगो ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि ऐसी आशंका है कि उनकी खोपड़ी में गहरी चोट आई है और रात में ख़ून चढ़ाना पड़ा है.

रविवार को हुई एक रैली में मॉर्गन चांगिरई और कई विपक्षी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया था.

 मैने देखा कि कैसे उन्हें पीटा गया. कभी-कभी तो वे लगातार 15 मिनटों तक डंडे से मॉर्गन चांगिरई की पिटाई कर रहे थे
टेंडाई बिटी

मॉर्गन चांगिरई को बुधवार को अदालत में पेश होना था लेकिन वे इतने बीमार हैं कि अदालत नहीं आ सके.

मॉर्गन चांगिरई के प्रवक्ता ने कहा, "मैं अदालत गया था पर हमें वापस जाने के लिए कहा गया, आरोपों के लेकर वहाँ स्थिति स्पष्ट नहीं है."

जबकि उनके वकील के मुताबिक मॉर्गन चांगिरई और 49 अन्य लोग अदालत में आए थे पर पिछले 24 घंटों मे सबको पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया है.

लेकिन इनमें से कई लोग बुधवार को अस्पताल में भर्ती थे.

'लगातार पिटाई'

मंगलवार को अदालत से जाते समय मॉर्गन चांगिरई ने कहा कि पुलिस ने लोगों पर वार किया जो अपनी सुरक्षा भी नहीं कर सकते.

मॉर्गन चांगिरई एमडीसी यानी मूवमेंट फ़ॉर डेमोक्रेटिक चेंज के अध्यक्ष हैं.

बीबीसी से बातचीत में एमडीसी के सदस्य ने बताया कि कैसे मॉर्गन चांगिरई की पिटाई की गई," मैने देखा कि कैसे उन्हें पीटा गया. कभी-कभी तो वे लगातार 15 मिनटों तक डंडे से मॉर्गन चैंगीराय की पिटाई कर रहे थे."

उधर दक्षिण अफ़्रीका ने ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे से कहा है कि वे विपक्षी नेताओं समेत आम नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करें.

दक्षिण अफ़्रीका आम तौर पर ज़िम्बाब्वे की आलोचना नहीं करता है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव, अमरीका और यूरोपीय संघ ने रविवार को ज़िम्बाब्वे में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ उठाए गए कदमों की आलोचना की है.

उधर ज़िम्बाब्वे के सूचना मंत्री ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि पुलिसकर्मियों ने उचित क़दम उठाए थे क्योंकि विपक्ष के लोग उन पर हमला कर रहे थे.

ज़िम्बाब्वे सरकार का कहना है कि वहाँ राजनीतिक रैलियों पर प्रतिबंध लगा हुआ है और रविवार की रैली से उस प्रतिबंध का उल्लंघन हुआ है.

ज़िम्बाब्वे में मुद्रा स्फ़ीति की दर 1700 फ़ीसदी है जो दुनिया भर में सबसे ज़्यादा है.

आर्थिक हालात, बेरोज़गारी और बढ़ती मंहगाई को लेकर ज़िम्बाब्वे में आम लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

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