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राबर्ट मुगाबे की पार्टी को बहुमत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ज़िंबाबवे में राबर्ट मुगाबे के नेतृत्व वाली सत्ताधारी पार्टी ने संसदीय चुनावों में दो तिहाई बहुमत से जीत हासिल कर ली है. दुनिया के कई देशों ने इस चुनाव की वैधता पर सवाल उठाए हैं और कहा है ये चुनाव निष्पक्ष नहीं थे. आज इन चुनावों में भाग लेनेवाले विपक्षी दलों की बैठक हो रही है जिसमें उनके शब्दों में ``इस धांधली भरे चुनाव’’ के बाद की स्थिति से निपटने पर विचार किया जाएगा. अब केवल कुछ ही परिणाम आने बाकी रह गए हैं लेकिन राष्ट्रपति राबर्ट मुगाबे की ज़ानू-पीएफ पार्टी ने दो तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है और अब वो देश के संविधान में किसी भी तरह का बदलाव लाने में सक्षम हैं. ये अभी नहीं पता है कि मुगाबे इस बहुमत का इस्तेमाल किस तरह करेंगे लेकिन अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि वो इसकी सहायता से अपनी रिटायरमेंट की योजना तय करेंगे. विपक्षी दल मूवमेंट फ़ॉर डेमोक्रेटिक चेंज ने कहा है कि चुनावों में धांधली हुई है और ब्रिटेन और अमरीका दोनों ने ही इन चुनावों की आलोचना की है. लेकिन दक्षिण अफ़्रीकी पर्यवेक्षकों ने कहा है कि ये चुनाव जनता की भावनाओं का सही ढंग से प्रतिबिंबित करते हैं. उन्होंने विपक्ष को सुझाव दिया है कि किसी तरह के असंतोष को ज़ाहिर करने के लिए वो क़ानून का सहारा लें लेकिन कहा जा रहा है कि जब न्यायपालिका में मुगाबे द्वारा नियुक्त लोग ही हों तो बुहत ज़्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती. ज़ानू पी एफ़ का कहना है कि इन चुनावों में किसी तरह की धांधली नहीं हुई है. जोसेफ़ मसीका का कहना है "उनका कहना है कि ये आरोप वही लगा रहे हैं जो ज़िदगी की वास्तविकताओं का सामना नहीं कर पा रहे. हमारे चुनाव बिल्कुल निष्पक्ष हुए हैं और लोगों ने उन्हें ही वोट दिया है जिन्हें वो देना चाहते थे. हम संतुष्ट हैं इन चुनावों से. " कुछ ऐसी ही परिस्थितियों में विपक्षी नेता आज अपनी रणनीति तय करने के लिए बैठक कर रहे हैं लेकिन ऐसा लगता नहीं है कि ज़िबाबवे की जनता सरकार को ललकारने के लिए विरोध प्रदर्शन करने की हिम्मत जुटा पाएगी. |
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