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ज़िम्बाब्वे में मतदान शांतिपूर्ण रहा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ज़िम्बाब्वे में संसदीय चुनाव के लिए मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हो गया है. लोगों ने मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और राजधानी हरारे तथा देश के दूसरे सबसे बड़े शहर बुलावायो में मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें रहीं. लेकिन विपक्षी दल, मूवमेंट फ़ॉर डेमोक्रेटिक चेंज, तथा मानवाधिकार गुटों ने आरोप लगाया है कि चुनाव स्वतंत्र तथा निष्पक्ष नहीं हो सकते. उनका कहना है कि मतदाताओं को धमकाया भी गया है और मतदाता सूची में भी भारी हेर-फेर की गई है. मगर पिछले 25 वर्षों से सत्ता चला रहे ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे ने शिकायतों को बकवास बताया है. उन्होंने दावा किया कि जीत उनकी ज़ानू-पीएफ़ पार्टी (ज़िम्बाब्वे अफ़्रीकन नेशनल यूनियन- पेट्रिऑटिक फ़ोर्स) की ही होगी. ज़िम्बाब्वे में संसद की 120 सीटें हैं और प्रारंभिक नतीजे 48 घंटे में आने शुरु हो जाएँगे. 30 सांसदों की नियुक्ति राष्ट्रपति मुगाबे करते हैं. हिंसा में कमी राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे की पार्टी पिछले 25 साल से ज़िम्बाब्वे में सत्ता में बनी हुई है. राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे 81 वर्ष के हैं और उनकी सबसे विवादास्पद नीति गोरे मालिकों की ज़मीन ज़ब्त कर उसे ग़रीब काले परिवारों में बाँट देने की रही है. विपक्षी दल 'मूवमेंट फ़ार डेमोक्रेटिक चेंज' की प्रवक्ता ने चुनावों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि हज़ारों ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूचियों में थे जो जीवित ही नहीं हैं. स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पिछले चुनावों के मुक़ाबले में इस बार हिंसा की घटनाओं में कमी आई है. लेकिन उनका ये भी कहना है कि प्रेस पर लगाए प्रतिबंध और ज़ोर-ज़बरदस्ती अब भी प्रमुख मुद्दे हैं. |
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