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शादी है, कोई जनाज़ा तो नहीं कि... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कहते हैं कि दूसरे की खुशी में शामिल होने से आप भी खुश, लोग भी खुश और ईश्वर भी खुश... पर सऊदी के एक शेख की खुशी कुछ धार्मिक कट्टरवादियों को रास नहीं आई. सऊदी के एक स्थापित शेख की कुछ धार्मिक विचारकों ने यह कहते हुए आलोचना की कि उन्होंने एक शादी के दौरान हो रहे नाच में शामिल होकर ग़लत काम किया है. और तो और, मामले ने तूल पकड़ा औऱ शेख़ के शादी में नाचने का फ़ुटेज वेबसाइट पर भी डाल दिया गया. पर शेख़ अब्दुल मोहसन अल-ओबैकन ने अपने आलोचकों को यह कहते हुए उनका मुंह बंद कर दिया कि वो शादी में नाचे तो कोई ग़लत नहीं किया. आखिर वो समारोह शादी का था किसी के जनाज़े का नहीं. उन्होंने कहा कि किसी समारोह में अपनी खुशी जाहिर करना किसी भी तरह से ग़लत नहीं है और उन्होंने ऐसा करके कोई भूल नहीं की है. शादी या जनाज़ा... शेख़ ने कहा कि जो लोग नाचने के बारे में शिकायत कर रहे हैं, वे लोग शादी के समारोह को भी ऐसा बनाए दे रहे हैं जैसे किसी जनाज़े के वक़्त माहौल होता है. ग़ौरतलब है कि शेख़ अब्दुल मोहसन सऊदी अरब के वरिष्ठ इस्लामिक विद्वानों की परिषद के स्थापित सदस्य भी हैं. इसके अलावा वो देश के न्याय मंत्रालय के क़ानूनी सलाहकार भी है. अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए शेख़ मोहसन ने कहा कि सऊदी समाज के लोगों को ऐसी बातों से छुटकारा पाना चाहिए. शेख ने अरबी के एक समाचार पत्र से बातचीत में स्वीकार किया कि उन्होंने नाच में हिस्सा लिया पर साथ ही उन्होंने पैगंबर मोहम्मद की ज़िंदगी की कई कथाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि नाच या ड्रम (ढोल) बजाने जैसे मनोरंजन में कोई दोष नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें काश वे मेरी बात मान लेते11 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस जाति पंचायत का दकियानूसी फ़ैसला01 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस धूमधाम से निकलेगी बरात काबुल में28 जून, 2007 | भारत और पड़ोस दुल्हनों की जोड़ी निकली लेकर घोड़ी 22 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस जनजाति ने समलैंगिक 'शादी' को मान्यता दी06 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सऊदी अरब में जबरन शादी पर रोक12 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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