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'सैनिकों की बीमारियाँ रसायनों से जुड़ी हैं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में हुए एक शोध से 1991 के खाड़ी युद्ध में लड़ने वाले उन हज़ारों अमरीकी सैनिकों के दावों को बल मिला है जिनके मुताबिक वे उस लड़ाई में भाग लेने के कारण कई बीमारियों से जुझ रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र समर्थित 29 देशों की गठबंधन सेनाओं ने 16 जनवरी 1991 को इराक़ी फ़ौजों के ख़िलाफ़ युद्ध शुरु किया था और 27 फ़रवरी को कुवैत को इराक़ी कब्ज़े से आज़ाद कराया था. इसमें गठबंधन सेनाओं के लगभग 290 सैनिक मारे गए थे. लेकिन खाड़ी युद्ध से लौटे अमरीकी सैनिकों में से अनेक ने कई तरह की बीमारियों या फिर मनोवैज्ञानिक समस्याओं की शिकायत की थी. संसदीय समिति की मुख्य वैज्ञानिक की रिपोर्ट कांग्रेस यानी अमरीकी संसद की एक समिति की मुख्य वैज्ञानिक ने कहा है कि इस संदर्भ में सौ से ज़्यादा अध्ययन हुए थे जिनका विश्लेषण किया गया है. मुख्य वैज्ञानिक बीट्रिस गोलोंब का कहना है कि उन्होंने पाया कि कई पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य संबंधित समस्याएँ तीन रसायनों से जुड़ी हुई हैं. ये रसायन हैं - सैनिकों को दिए जाने वाला एक एंटी-नर्व गैस एजेंट यानी दिमाग़ पर असर करने वाली गैस के ख़िलाफ़ काम करने वाला एक रसायन, रेत में इस्तेमाल होने वाला एक कीटनाशक और नर्व गैस सेरीन. बीट्रिस गोलोंब के अनुसार लगभग एक-तिहाई पूर्व सैनिकों ने थकान, मांसपेशियों में दर्द, यादाश्त खोने और सांस लेने में तकलीफ़ की शिकायत की है. इस विश्लेषण के मुताबिक कुछ लोगों में पाए जाने वाले जीन से उन पर इन रसायनों का ज़्यादा असर होता और उनमें इन बीमारियों का ज़्यादा ख़तरा होता है. | इससे जुड़ी ख़बरें फिर बुश और वही खाड़ी20 मार्च, 2003 | पहला पन्ना शरणार्थियों पर रेड क्रेंसेंट की चिंता13 मार्च, 2003 | पहला पन्ना सद्दाम हुसैन को दफ़नाया गया31 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना 'सद्दाम को सज़ा मील का पत्थर'06 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना सद्दाम हुसैन के सौतेले भाई को फाँसी15 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना सद्दाम के सहयोगी रमादान को फाँसी20 मार्च, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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