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मंगलवार, 26 फ़रवरी, 2008 को 23:54 GMT तक के समाचार
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इराक़ युद्ध: ब्यौरा जारी करने का आदेश
ब्रितानी संसद
सरकार इस जानकारी को सार्वजनिक करने से कतराती रही है
ब्रिटेन सरकार को ये आदेश दिया गया है कि वो कैबिनेट की उस महत्वपूर्ण बैठक का ब्यौरा सार्वजनिक करे जिसमें इराक़ युद्ध की क़ानूनी वैधता पर चर्चा हुई थी.

ब्रिटेन के सूचना आयुक्त यानि इंफ़र्मेशन कमिश्नर रिचर्ड थॉमस ने कहा कि ये मुद्दा 'गंभीर और विवादित है' इसीलिए इन दस्तावेज़ों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए.

ब्रिटेन सरकार के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि वो इस जानकारी को सार्वजनिक करने से कतराती रही है.

इराक़ युद्ध से पहले ब्रिटेन की कैबिनेट की दो अहम बैठकें हुई थीं. अब शायद लोग ये जान पाएं कि इन बैठकों में हुआ क्या था और ये संभव हुआ है ब्रिटेन के सूचना आयुक्त के अभूतपूर्व फ़ैसले की वजह से.

हालांकि ब्रिटेन सरकार ने कहा था कि ये जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए और इसके लिए दो कारण बताए थे.

पहला यह कि इससे मंत्रिमंडल की सम्मिलित ज़िम्मेदारी पर असर पड़ेगा और दूसरा यह कि अहम बैठकों में नेता खुलकर किसी मुद्दे पर बात करने से कतराएँगे.

दलील नाकाफ़ी

लेकिन सूचना आयुक्त रिचर्ड थॉमस ने इन कारणों को नाकाफ़ी क़रार देते हुए कहा कि जनता को इराक़ युद्ध के असल कारण जानने का हक़ है.

टोनी ब्लेयर
आदेश टोनी ब्लेयर के कार्यकाल की एक कैबिनेट बैठक से संबंधित है

यह एक एहम फ़ैसला है. जनता शायद अब यह जान पाए कि ब्रिटेन के किस मंत्री ने इराक़ युद्ध पर क्या सवाल उठाए, किसने युद्ध का विरोध किया और इस पूरे मुद्दे पर मंत्रिमंडल ने कितने विस्तार से बहस की.

ब्रिटेन की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी लिबरल डेमोक्रैट्स, ने जानकारी सार्वजनिक करने की घोषणा का स्वागत किया है.

पार्टी के विदेश मामलों के प्रवक्ता एड डेवी कहते हैं, "लेबर पार्टी ने गुपचुप काम करने के लिए जो गोपनीयता की दीवार खड़ी की थी उसकी दीवार ईंट-दर-ईंट टूट रही है. लेबर पार्टी ने बहुत कुछ छिपाया है और सूचना आयुक्त की बदौलत जनता कुछ समय में सच जान सकेगी लेकिन यह शर्म की बात है कि सरकार से दस्तावेज़ एक-एक करके छीनने पड़ रहे हैं."

उधर डाउनिंग स्ट्रीट के अधिकारियों का कहना है कि वो इस के ख़िलाफ़ अपील करने पर विचार कर रहे हैं.

साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि दस्तावेज के सार्वजनिक होने के बाद भी शायद ज़्यादा जानकारी सामने न आए क्योंकि मंत्रिमंडल की बैठकों के मिनिट ज़्यादा विस्तार से नहीं लिए जाते हैं, हरेक शब्द लिखा नहीं जाता है.

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