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शनिवार, 12 जनवरी, 2008 को 09:33 GMT तक के समाचार
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इराक़ में फिर उम्मीद नज़र आ रही है: बुश
बुश
जॉर्ज बुश ने कड़ी मेहनत के लिए सैनिकों का शुक्रिया अदा किया
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि पिछले साल इराक़ में अमरीकी सैनिकों की संख्या में बढ़ोत्तरी के बाद अब वहाँ उम्मीद लौटती नज़र आ रही है.

जॉर्ज बुश ने ये बात कुवैत में कही जहाँ वे एक सैनिक अड्डे पर आए हुए थे. बुश ने कहा कि जुलाई तक बीस हज़ार सैनिकों को वापस बुलाने का काम पटरी पर है लेकिन इससे ज़्यादा सैनिकों को वापस बुलाने के बारे में अभी कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है.

ये सैनिक अड्डा कुवैत के अरफ़ीजान में है जहाँ एक दल अफ़ग़ानिस्तान और मध्य पूर्व की गतिविधियों पर नज़र रखता है.

 साल भर पहले के मुकाबले इराक़ अब एक नया देश है. हमें पूरी कोशिश करनी चाहिए कि वर्ष 2008 में हालात और बेहतर हों
जॉर्ज बुश

अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले साल इराक़ में तीस हज़ार अतिरिक्त अमरीकी सैनिक भेजने के क़दम से इराक़ अब एक ऐसा देश बन गया है जहाँ लोगों में उम्मीद लौट रही है.

उनका कहना था, "साल भर पहले के मुकाबले इराक़ अब एक नया देश है. हमें पूरी कोशिश करनी चाहिए कि वर्ष 2008 में हालात और बेहतर हों."

इराक़ में अमरीका के सैन्य कमांडर जनरल डेविड पेट्रियस और इराक़ में अमरीकी राजदूत रयान क्रॉकर ने जॉर्ज बुश से बातचीत की और बाद में अमरीकी राष्ट्रपति वहाँ तैनात करीब पंद्रह हज़ार सैनिकों से भी मिले.

जॉर्ज बुश ने कहा, "इराक़ में सैनिकों की संख्या और घटाई जाए या नहीं ये इस पर निर्भर करेगा कि वहाँ हालात कैसे हैं. ये जनरल पेट्रियस को तय करना है कि ऐसा संभव है या नहीं."

ईरान का मुद्दा

इसराइली और फ़लस्तीनी नेताओं से मिलने के बाद जॉर्ज बुश खाड़ी क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं. उन्होंने कुवैत में शेख सबा से बातचीत की.

संवाददाताओं का कहना है कि वे अरब क्षेत्र के अपने कई सहयोगियों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे मध्य पूर्व शांति प्रस्ताव का समर्थन करें.

साथ ही उन्होंने सीरिया और ईरान से भी कहा कि वो इराक़ में हिंस कम करने के लिए और क़दम उठाए.

जॉर्ज बुश का मकसद है कि इसराइल के साथ बातचीत में अरब देश फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास का समर्थन करें.

लेकिन बीबीसी संवादादाता का कहना है कि कुवैत समेत खाड़ी क्षेत्र के कई देशों की असल चिंता इसराइल-फ़लस्तीनी मुद्दा नहीं है बल्कि ईरान और उसके प्रति अमरीका का रवैया है.

माना जा रहा है कि खाड़ी देश बुश से कहेंगे कि वो ईरान-अमरीका मसले का शांतिपूर्ण हल चाहते हैं न कि सैन्य हल.

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