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बुधवार, 06 फ़रवरी, 2008 को 13:36 GMT तक के समाचार
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काँटे की है टक्कर का एशियाई पहलू

ओबामा को एशियाई समुदाय का समर्थन कम ही मिल रहा है
अमरीका में सुपर ट्यूज़डे का दिन बीत गया है और सबको इंतज़ार होगा कि जीता कौन हारा कौन.

डेमोक्रेट्स की ओर से अगर हिलेरी क्लिंटन की सुनें तो लगेगा जीत उनकी हुई, बराक ओबामा की सुनें तो लगेगा उन्होंने बाज़ी मारी है.

सही मायनों में देखें तो दोनों ही जीते हैं या फिर कोई भी नहीं जीता है और मामला और उलझ गया है.

अगर ओबामा की बात करें तो मंगलवार को दांव पर लगे राज्यों में से ज़्यादा उनके पास गए हैं, लेकिन हिलेरी जीती हैं कैलिफ़ोर्निया, न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी और मैसाच्यूसैट्स जैसे राज्यों में.

इन राज्यों की आबादी उन राज्यों के मुक़ाबले काफ़ी ज़्यादा है जहाँ ओबामा जीते हैं.

इसलिए अभी हिलेरी के पास डेलिगेट्स ज़्यादा हैं और ज़ाहिर है कि अंतिम फ़ैसला डेलिगेट्स की संख्या से ही होगा.

कैलिफ़ोर्निया जिसे इस मुक़ाबले का सबसे बड़ा इनाम माना जा रहा था, वहां हिलैरी की जीत के पीछे भारत पाकिस्तान बांग्लादेश से आकर बसे लोगों की अहम भूमिका थी.

हिलेरी को कैलिफ़ोर्निया के एशियाई समुदाय का समर्थन मिला है

अगर पेचीदगियों में जाएं तो इस मामले पर किताब लिखी जा सकती है लेकिन एक जो ख़ास बात देखने को मिली वो राजनीति का अनूठा रूप दिखाती है.

ओबामा का पूरा प्रचार इस बात के इर्द गिर्द घूमा है कि वो उनके लिए आवाज़ उठा रहे हैं जो ग़रीब हैं, रोज़ी रोटी को मोहताज़ हैं लेकिन उन्हें वोट उस तबके का ज़्यादा मिला है जिसकी जेब काफ़ी गहरी है, अच्छा खाता पीता है, बड़े बड़े मंहगे कालेज में जाता है.

न्यूयॉर्क का भरे पूरे मैनहैटन इलाके में एक महिला का तो ये भी कहना था कि हर ख़ूबसूरत लड़की ओबामा के साथ है.

वहीं पड़ोस के राज्य न्यू जर्सी का वो इलाक़ा जहां छोटे छोटे काम धंधों में लगे भारतीय और पाकिस्तानी हैं, लातिन अमरीकी हैं और अफ़्रीकन अमेरिकन या काले हैं वहां ज़्यादा हिलेरी का ज़ोर था जबकि उन पर आरोप लगता है कि वो कार्पोरेट और पैसेवालों के साथ हैं.

रिपब्लिकन

रिपबलिकंस के मामले में माना जा सकता है कि सुपर ट्यूज़डे जॉन मैकेन के नाम गया लेकिन वो भी जिसे नॉक आउट पंच कहते हैं वो नहीं मार पाए.

मीडिया और विश्लेषकों ने जिस रिपबलिकन मुक़ाबले को केवल मैकेन और मिट रॉमनी की टक्कर करार दी थी और माइक हकाबी को नज़रअंदाज़ कर दिया था उन्हें मुंह की खानी पड़ी.

रिपब्लिकन पार्टी की रेस में मैक्केन का रास्ता साफ़ दिख रहा है

हकबी ने कई राज्यों में जीत हासिल की. तो भले ही मैकेन काफ़ी आगे हों, अभी रिपबलिकन कैंप में भी सबकुछ खत्म नहीं हुआ.

डेमोक्रेट्स में अब सुपर डेलीगेट्स यानी पार्टी के बड़े-बड़े अधिकारियों की भूमिका कहीं ज़्यादा अहम हो जाएगी क्योंकि उनके वोट जिसके पास गए उसका पलड़ा भारी हो जाएगा और वहां हिलेरी दमदार हैं.

अब हर राज्य अहम है और उनमें से कई जगह ओबामा भारी पड़ेंगे हिलेरी पर.

यानी दोनों ही के लिए भागमभाग जारी रहेगी, टेलिविज़न ऐड्स खरीदेगे जाएंगे, होटलों के बिल बढ़ेंगे, टेलीविज़न चैनल्स की आमदनी बढ़ेगी और मामला लंबा चलेगा.

और क्या पता इसीसे कहीं मंदी की ओर भाग रही अर्थव्यवस्था की सेहत भी थोड़ी बेहतर हो जाए.

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